बिस्कोहर। नगर के राम जानकीनगर वार्ड में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य दुर्गेश शुक्ल ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि कंस के अत्याचार से पृथ्वी वासी परेशान थे। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों होना तय है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को कई बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहा। कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने 11 वर्ष की अल्पायु में कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया। लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने माता-पिता वसुदेव और देवकी और महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया। कथाव्यास ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है सिर्फ संकल्प की कमी होती है।