पथरा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की कथा मनुष्य को जीने का तरीका सिखाती है। माता-पिता ,भाई बंधु, पड़ोसी से आदर्श व्यवहार करना संसार के एक मात्र ग्रंथ रामायण में निहित है। यह बातें पारसमणी महाराज ने पथरा बाजार में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के दौरान आयोजित राम कथा में कही। कथा के प्रथम दिन उन्होंने कहा कि रामकथा श्रवण करने से स्वर्ग की प्राप्ति हो न हो सांसारिक समस्याओं से मुक्ति अवश्य मिल जाएगी। आज मामूली संपत्ति हेतु भाई-भाई का दुश्मन बन जाता है। किंतु भगवान राम ने माता-पिता की आज्ञा पर छोटे भाई के लिए राजा का पद ही त्याग दिया। अनुज भरत ने भी सत्ता को तुच्छ समझ बड़े भाई के नाम पर विवशता में शासन संभाला। उन्होंने कहा कि आज माता-पिता को वृद्धाश्रम में जाना पड़ता है। संतान के पास उनकी सेवा का समय नहीं है। सोचिए भगवान राम ने माता-पिता के आदेश पर सब कुछ त्याग दिया था। उन्होंने सवाल किया क्या राम को मानने वाला ऐसा कर सकता है। संवाद