अमरगढ़ शहीद स्थल पर अमरगढ़ बलिदान का मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
सेनानियों पर बरसीं गोलियां तो छलक पड़े आंसू
सिद्धार्थनगर। अमरगढ़ महोत्सव में शुक्रवार देर शाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शहादत का मंचन किया गया। सेनानियों पर अंग्रेजों की ओर से गोलियां बरसाने से मची चीख-पुकार का दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। कलाकारों ने उम्दा अभिनय और संवाद कौशल से 26 नवंबर 1858 की घटना को जीवंत कर दिया। शहादत का दृश्य जब आंखों के सामने आया तो भावुक लोगों का गला रुंधने लगा। उसी दौरान दर्शकों के बीच से जयहिंद, भारत माता की जय के नारे लगे तो देश भक्ति का भाव जागृत हो गया।
नृत्यांजलि फाउंडेशन एवं संस्था भरत रंग लखनऊ से आए 30 सदस्यीय दल ने बलिदानी घटना को जीवंत कर दिया। घोड़े पर सवार क्रूर अंग्रेजों की बर्बरता दर्शकों के रोंगटे खड़ी करने वाली थी। एक तरफ जहां निहत्थे भारतीय थे तो वहीं, दूसरी ओर बंदूकों से लैस अंग्रेजों की फौज। स्थानीय लोगों को अपने पुरखों की शहादत को नाट्य रूपांतरण ने तरोताजा कर दिया। लगभग डेढ़ घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति ने लोगों को झकझोर कर रख दिया।
नाटक में कुछ पल ऐसे आए कि लोग अपने आंखों को नम होने से नहीं रोक पाए। विशेष रूप से अमरगढ़ में बाला राव सहित सैकड़ों लोगों की शहादत का दृश्य और राप्ती तट पर 80 से अधिक लोगों की शहादत के दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दी। सेनानियों पर कैप्टन कैडूलस की अमानवीय क्रूरता और भारतीयों की मूछ के बाल उखाड़ने वाले अंग्रेज अफसर की क्रूरता के दृश्यों ने दर्शकों को झकझोर दिया।
वहीं, कार्यक्रम के अंत में कामरान रिजवी (हल्लौरी) की ओर से तिरंगा फहराने वाले दृश्य देखकर लोगों ने गर्व महसूस किया। दर्शकों ने जमकर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाए। नाट्य रूपांतरण की परिकल्पना और निर्देशन चंद्रहास सिंह ने किया, जबकि संयोजन रागिनी श्रीवास्तव ने किया।