सिद्धार्थनगर। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति वैसे तो बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई थी, लेकिन तमाम तरह के एप पर काम कराकर उन्हें ऑपरेटर बना दिया गया है। हालत यह है कि शिक्षकों का अधिकतर समय इन एप पर विभिन्न तरह के डाटा को फीड करने में चला जाता है। ऐसे में वह बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इन कामों के लिए अलग से किसी ऑपरेटर या बाबू की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि शिक्षक अपना मूल काम कर सकें।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से वर्तमान में छह से अधिक एप संचालित किए जा रहे हैं। इन एप पर विभिन्न तरह का डाटा फीड करने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। शिक्षक भी पढ़ाने का काम छोड़कर इसी में लगे रहते हैं। अधिकतर शिक्षकों का कहना है कि उनकी तैनाती बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई है, मगर हर दिन नए- नए एप के शुरू किए जाने से बच्चों को निपुण बनाने में समस्या आ रही है। उनका कहना है कि अधिकतर समय परिवार सर्वेक्षण और एप पर डाटा फीड करने में ही गुजर जा रहा है। ऊपर से सर्वर भी साथ नहीं देता है।
पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री कलीमुल्लाह ने बताया कि शिक्षकों का मूल कार्य बच्चों को शिक्षा प्रदान करना है। निपुण लक्ष्य को प्राप्त करने की स्थिति को देखते हुए उन्हें अन्य कार्यों में नहीं उलझाना चाहिए। शिक्षा से संबंधित विवरण के लिए पंचायत और ब्लॉक स्तर पर कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा में हुए नए में प्रयोगों की समीक्षा करके सुधार करने की आवश्यकता है।
शासन के निर्देश के क्रम में सभी एप का क्रियान्वयन कराया जाता है। शिक्षकों को इस कार्य के एवज में दिए जाने वाली सुविधा का निर्णय शासन को लेना है।
- देवेंद्र कुमार पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी