सिद्धार्थनगर। पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर की कहानी से शायद ही कोई अनजान होगा। फोन कॉल पर वह कई बाधाओं से गुजरते हुए पाकिस्तान से भारत चली आई। यहां भी सीमा हैदर की तरह से किशोरियों सीमा लांघ रही हैं। अनजान कॉल पर प्यार में फंस जा रही हैं और देश की सीमा लांघने से भी नहीं डर रही हैं। प्यार का जादू ऐसा है कि वह अपनी जिदंगी को खतरे में डालने से नहीं डर रही हैं। फोन और मैसेंजर के जरिए उपजे प्यार के बीज को हकीकत में बदलने के लिए नेपाल सीमा पार कर जा रही हैं।
हाल में ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं। जबकि पहले भी इस प्रकार के मामले सामने आए हैं, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के चलते सीमा पार करने से पहले ही उन्हें बचा लिया गया और समझा-बुझाकर बाॅर्डर पर काम करने वाली संस्थाओं के माध्यम से उनके परिवार को सौंप दिया गया।
इस प्रकार की बढ़ती घटनाओं पर समाजशास्त्री चिंता जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि कहीं न कहीं अभिभावकों की चूक, जिसकी वजह से कम उम्र में बच्चे बहक रहे हैं। उनके करीब रहने और उन्हें अच्छा बुरा के बारे में जानकारी देने से इस प्रकार के मामलों से बचा जा सकता है।
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फेसबुक से मिला नंबर, मैसेंजर से बन गई दोस्त
हाल ही सीमा पर स्थित बढ़नी से सुरक्षा एजेंसियों ने एक किशोरी को नेपाल जाते हुए रोक लिया। जब उससे सवाल करने लगे तो हड़बड़ा गई। बाॅर्डर पर काम करने वाली संस्था और सुरक्षा एजेंसियों से पूछताछ में उसने बताया कि नेपाल के एक लड़के से उसका संपर्क हो गया है। उसी के बुलावे पर जा रही है। जब लोगों ने उसे पूछा तो कहा कि फेसबुक के मैसेंजर के जरिए दोस्ती हुई। लगातार हम लोग बात करते हैं। उससे पहली बार मिलने जा रही हूं, कभी देखा नहीं है। लड़की इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव की निवासी थी। समझाने के बाद उसे परिवार के लोगों को बुलाकर सौंप दिया गया।
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अनजान कॉल पर बात, बिना पहचाने मिलने निकल गई
27 सितंबर का ककरहवा बार्डर से सुरक्षा एजेंसियों ने एक किशोरी को पकड़ा। जब उससे पूछा तो उसने बताया कि नेपाल जा रही है। उसे एक आर्यन गुप्ता नाम के लड़के से मिलना है। जब पूछा गया कि संपर्क कैसे हुआ तो उसने बताया कि कॉल करते समय एक नंबर पर लग गया। बात अच्छी लगी तो दोस्ती बढ़ी और छह माह से बात कर रहे हैं। लुंबिनी मिलने के लिए बुलाया है, वहीं जा रहे हैं। लड़की ने बैग ले रखा था और तैयारी करके घर से निकली थी। बार्डर पर काम करने वाली संस्था एएचटीयू के लोग उसे लेकर गए और पता पूछकर परिवार लोगों को जानकारी देकर बुलाया।
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फोन कॉल पर बात में अब तक घर छोड़ चुकी हैं कई किशोरियों
पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि लड़कियों के भागने के अधिकांश मामलों में जांच के दौरान यही सामने आ रही है कि सोशल मीडिया और अनजान फोन कॉल पर संपर्क हुआ। एक दो बार मिले और फिर हमेशा के लिए साथ रहने की सामने वाला लुभावने वादे किया और घर छोड़कर चली गईं। इसमें कहीं न कहीं परिवार की भी कमी है। जिसकी वजह से इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं।
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बोले जानकार
बच्चों को खुश रखने के लिए लोग उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने का प्रयास करते हैं। इस प्रयास के बीच कम उम्र के बच्चे बहकने लगते हैं। जिसका अभिभावकों को तनिक आभास नहीं होता है। कब बच्चे आगे निकल गए और कुछ गलत कर लिए यह जबतक जानकारी होती है, तब वह बहुत आगे निकल चुके होते हैं। इसलिए बच्चों के करीब रहें, उन्हें अच्छे और बुरे में अंतर को समझाएं। अगर वह लगातार फोन पर बात कर रहे हैं तो उसे जरूर केयर करें। उन्हें टोंके और बात करने वाले के बारे में जानकारी भी लें। यह करने से कम उम्र के बच्चे और बच्चियों के घर छोड़कर चले जाने के मामले कम होंगे।
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महिलाओं से संबंधित जो भी मामले सामने आते हैं, उसमें कार्रवाई की जाती है। किशोरियों और युवतियों के मामलों में परिवार के लोगों से भी वार्ता किया जाता है। काउंसिलिंग करके उन्हें समझाया भी जाता है, जिससे आगे उनके कदम न बहंके।
-अखिलेश कुमार वर्मा, सीओ सदर