सिद्धार्थनगर। बाइक चोरी होने के बाद इसलिए नहीं मिलती है कि जब तक पुलिस सक्रिय होती है, तब तक लिफ्टर उनसे दो कदम आगे बढ़कर उसे नेपाल पहुंचा देते हैं। कबाड़ की आड़ में नई गाड़ियां खपा दे रहे हैं। भारतीय क्षेत्र की अपेक्षा नेपाल में गाड़ियां अधिक महंगी होने के कारण तस्कराें के लिए काली कमाई की राह आसान हो रही है।
खड़ी बाइक भी नेपाल में यहां से अच्छी दर पर बिक जाती है। वहां पर पहुंचने के बाद उन बाइकों को कोई पूछता नहीं है। कुछ मिलाकर कहें तो आसपास के किसी भी जनपद से बाइक चोरी हो तो सिद्धार्थनगर वाया नेपाल यहीं से पहुंचता है। क्योंकि पूर्व में जिले में पकड़े गए बाइक लिफ्टर गिरोह के सदस्यों ने बस्ती और अन्य जनपदों से बाइक चोरी करके नेपाल भेजने की बात स्वीकार कर चुके हैं। इसमें इनका सहयोग बाइक मैकेनिक और भंगार के लोग भी करते हैं। हर साल औसतन जिले में 100 से अधिक बाइक चोरी होती है। जनपद में बाइक चोरों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो नजर हटते ही बाइक चुरा लेगा। कुछ ही मिनटों में पूरी बाइक का पुर्जा-पुर्जा खोलकर अलग-अलग कर दिया जाएगा। रिपोर्ट लिखवाने के बाद जबतक पुलिस सक्रिय होगी, तब तक गिरोह के लोग इसे सीमा पार करा देंगे। इसके बाद चक्कर काटते रहिए, बाइक नहीं मिलने वाली। सीमावर्ती क्षेत्रों से चोरी होने वाली हर बाइक नेपाल में पहुंच रही है। जिसकी भारतीय बाजार की तुलना में ढ़ाई गुना अधिक कीमत मिल रही है। लाख कोशिशों के बाद पुलिस इन पर अंकुश नहीं लगा पा रही है।
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नेपाल के शातिर ने उगले थे राज
मई माह में मोहाना पुलिस के हत्थे चढ़े नेपाली गैंग के सदस्य अनिल कहार निवासी लबनी थाना कपिलवस्त नेपाल ने पुलिस पूछताछ में बताया कि सीमा पर सख्ती बढ़ने के बाद उन्होंने अब बाइक को पार करने का तरीका बदल दिया है। चोरी के बाद कुछ देर में ही वे बाइक को खोलकर पार्ट में तब्दील कर दे रहे हैं। झोले में रखकर सीमापार करते ही बाइक फिर खड़ी कर देते हैं।
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खुली सीमा का लाभ उठाते हैं तस्कर
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगी है। जो पूरी तरह से खुली हुई है। देशविरोधी तत्वों की रोकथाम के लिए सीमावर्ती थानों के अलावा सुरक्षा एजेंसियां भी लगी हुई हैं। बावजूद इसके तस्कर खुली सीमा और पगडंडियों का सहारा लेकर अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते हैं। जैसा की मौजूदा समय में बाइक चोरी करने वाला गिरोह है। नेपाल से संचालित होने वाले बाइक चोरी करने वाले गिरोह के सदस्य बाइक चलाकर ले जाने के साथ ही पकड़े जाने के भय से अब चोरी की बाइक को खोलकर पार्ट में बदल दे रहे हैं। कैरियर के माध्यम से झोले में रखकर अलग-अलग पार्ट को सीमा पार पहुंच जाते हैं। कुछ के तो पार्ट ही बेच देते हैं। कई बाइक को बाइक तैयार करके बेचते हैं। कारण इनके गिरोह में मोटर मैकेनिक भी जुड़े हैं जो भारत और नेपाल दोनों जगह पर हैं। इसलिए जिले में चोरी होने वाली बाइक नहीं मिलती है। पुलिस की पूछताछ में गिरोह के सदस्य यह बात खुद बता चुके हैं।
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नेपाल का गिरोह पकड़ा गया
लोटन कोतवाली की पुलिस ने अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में बाइक चोरी करने वाले गिरोह के एक गुर्गे को पकड़ा था। जो नेपाल का रहने वाला था। पूछताछ के बादउ सकी निशानदेही पर चोरी की नौ बाइक बरामद की गई थी। पूछताछ पता चला था कि बाइक चारी के नेपाल में बेचता था।
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छह बाइक के साथ पकड़ा गया सरगना
मोहाना थाने की पुलिस ने नेपाल से बाइक चोरी करने वाले एक गैंग के सरगना सहित दो लोगों को दबोचा था। इनके कब्जे से चोरी की छह बाइक बरामद की गई थी। एसओ जीवन तिवारी की पूछताछ में पता चला था कि यह गिरोह बाइक चोरी करके नेपाल में बेचता है। सीमापार होते ही ढाई गुना कीमत हो जाती है। कोई भी बाइक हो नेपाल में पहुंचने के बाद उसकी कीमत ढ़ाई गुना हो जाती है। जैसे एक बाइक जो कुछ दिन चली हो और भारतीय बाजार में उसकी कीमत 40 हजार है। वह जब नेपाल में पहुंचती है तो कीमत बढ़कर 90 हजार से एक लाख रुपये हो जाती है।
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भारतीय बाजार से जाता वाहनों का स्पेयर पार्ट
नेपाल से सूत्रों के मुताबिक बिकने वाले वाहनों के स्पेयर पार्ट भारतीय बाजार से ही जाते हैं। लीगल तरीके से जाने कई प्रकार के टैक्स लगते हैं। इसलिए चोर उनका पार्ट निकालकर ऑटो पार्ट की दुकान पर बेच देते हैं। पहले से सेटिंग वाली दुकान पर ही देते हैं। ऐसे में दुकानदार को कम कीमत पर पार्ट मिल जाता है। जिसकी वह ग्राहकों ने अच्छी कीमत पा जाता है। इसमें शॉकर, चेन स्पाकिट, हेड लाइट रिंग आदि शामिल है।
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नेपाल में नहीं है चेकिंग की आधुनिक मशीन
भारत में पुलिस चेकिंग करने के मामले में तकनीकी सहारा अधिक ले रही है। जिससे सही वाहन स्वामी का पता चल जाता है। लेकिन नेपाल में डिजिटल चेकिंग व्यवस्था नहीं है। कागजात देखकर वह चेकिंग करते हैं। इसलिए पकड़े जाने का डर न के बराबर रहता है।
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एक वर्ष में औसतन 150 बाइकें हो जाती हैं पार
जिले में अगर वाहन चोरी के आकड़ों पर गौर करें तो 100 से अधिक बाइक हर साल चोरी होती है। जो किसी ने किसी माध्यम से नेपाल पहुंचती है। समय रहते या फिर भारतीय क्षेत्र में चलती हुई पाए जाने पर ही बरामद हो पाती है। जैसा कि एक साल में एसओजी और थानों की पुलिस अबतक लगभग 80 से अधिक बाइक बरामद की है। 50 प्रतिशत से अधिक वाहन चोरी होने के बाद नहीं मिलते हैं। केस भले ही पुलिस दर्ज कर ले। वहीं, जिले में आठ में माह में बाइक चोरी होने के 52 मामले दर्ज हुए हैं।
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जब कोई नहीं मिलता, तब कबाड़ में काट दी जाती है बाइक
चोरी करने वाले गिरोह चोरी करके जब बाइक लाता और सीमा पार नहीं पहुंचा पाता है तो उसे कबाड़ की दुकानों पर रख देता है। क्योंकि यहां पर पकड़े जाने का डर नहीं रहता है। अगर अधिक समय तक नेपाल नहीं पहुंचा पाए तो उसे भंगार में दे देते हैं। उसकी दुकान पर कटकर कई पार्ट में बाइक बिक जाती है किसी को पता ही नहीं चलता है। कारण पूर्व में डुमरियागंज और गोल्हौरा थाना क्षेत्र में बाइक चोरी करने वाले गिरोह का भांडाफोड़ हुआ था। जिसमें स्थानीय भंगार वाले और मोटर मैकेनिक शामिल पाए गए थे।
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दो साल बाद भी नहीं मिली बाइक
डुमरियांगज ब्लॉक क्षेत्र में कार्यरत रोजगार सेवक कपिलदेव ने बताया कि २५ अक्तूबर २०२१ को ब्लॉक से उनकी बाइक चोरी हो गई थी। केस भी दर्ज हुआ था, लेकिन बाइक नहीं मिली। बाइक मिलने की उम्मीद छोड़कर दूसरी बाइक ले लिए। वहीं इटवा थाना क्षेत्र के पटना गांव निवासी इंद्रपाल ने बताया कि उनकी बाइक बीते माह १६ जुलाई को ब्लॉक परिसर से गायब हो गई थी। केस दर्ज कराया। सीसी कैमरे की मदद से पुलिस ने छानबीन किया और बाइक मिल गई। अगर बाइक नहीं मिलती तो खरीद पाना मुश्किल था।
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बोले अधिकारी
अपराध पर लगाम लगाने के लिए सीमावर्ती थानों की पुलिस को दिशा- निर्देश दिया गया है कि वह सीमा क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरते और संदिग्ध मिलने वालों पर कार्रवाई करें।
अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
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श्याम सुंदर तिवारी
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