ककरहवा। नेपाल सीमा से सटे ककरहवा बाॅर्डर पर एसएसबी 43वीं वाहिनी ने बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे नेपाल सीमा से सटे ककरहवा कस्बा से 7 महिलाओं सहित 16 लोगों को रोक लिया। जांच में पता चला कि सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। लेकिन विदेशियों को नेपाल जाने के लिए ककरहवा बॉर्डर का रास्ता वैध न होने के कारण एसएसबी ने सभी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ करने के बाद उनके पास सभी कागजात वैध पाये जाने पर शाम पांच बजे के करीब सभी छोड़ दिया गया।
नेपाल बाॅर्डर से सटे ककरहवा कस्बे में सुबह कुछ महिलाएं और पुरुष घूमते हुए दिखे। इसी बीच एसएसबी के जवानों ने संदेह होने पर रोक लिया। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई पूछताछ में पता चला कि इन सभी को बांग्लादेश से भारत में घूमने के लिए वीजा मिला है। इस वीजा की वैधता अवधि मई 2024 तक बताई जा रही है। आरोपितों ने बताया कि वे 4 मार्च को बांग्लादेश से हरदासपुर बॉर्डर के रास्ते भारत में आये थे। यहां से इन्होंने टूरिस्ट बस से बौद्ध सर्किट से जुड़े सारनाथ, बोधगया, श्रावस्ती, राजगीर, नालंदा सहित कपिलवस्तु का दर्शन किया। बृहस्पतिवार की सुबह ये ककरहवा कस्बा पहुंचे। जहां से ये लोग नेपाल में स्थित गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी का दर्शन करने जा रहे थे।
इस प्रकार है बांग्लादेशी नागरिकों का नाम
पूछताछ में सभी की पहचान चौधरी सुब्र बरुआ, प्रफुल्ल बरुआ, चित्रसेन बरुआ, असीम कुमार चौधरी, निपु कुमार बरुआ, शिल्पी बरुआ, अमरेंद्र बरुआ, श्रीमति काना बरुआ, नैपाल कुमार बरुआ, संजूश्री बरुआ, लिप्पी बरुआ, मृनल बरुआ, उषा बरुआ, सुफला चकमा बरुआ, मनु बरुआ, उत्तम कुमार बरुआ के रूप में हुई है।