सिद्धार्थनगर। अगर आप लंबे समय तक गर्दन झुकाकर या बिस्तर पर लेटकर मोबाइल पर गेम खेलने या फिल्म देखने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए। इससे आपकी गर्दन और रीढ़ की हड्डियां इधर-उधर खिसक सकती हैं। गर्दन की हड्डी बढ़ने से आप सर्वाइकल के शिकार भी हो सकते हैं। अगर समस्या ज्यादा दिन बनी रही तो ऑपरेशन तक की नौबत आ सकती है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग की ओपीडी में ऐसे केस लगातार आ रहे हैं। हड्डी के डॉक्टर कुछ मामले में इलाज कर रहे हैं, जबकि गंभीर मरीजों को रेफर कर दे रहे हैं, क्याेंकि मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन की नियुक्ति नहीं हुई है। हर दिन ओपीडी में 25-30 मरीज ऐसे आते हैं, जो सर्वाइकल, कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी में दर्द, लगातार चक्कर आने जैसी समस्या से पीड़ित हैं। केस हिस्ट्री व जांच से पता चला है कि इनमें से करीब 70 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो मोबाइल पर तीन से चार घंटे तक गेम खेलते और फिल्में देखते थे। इसमें युवा वर्ग की संख्या अधिक है। कुछ महिलाएं भी हैं जो अपने पसंदीदा धारावाहिक मोबाइल पर देखने में इतनी मशगूल होती हैं कि समय का ख्याल ही नहीं रख पातीं। अब वे सर्वाइकल से परेशान हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से जो प्रारंभिक लक्षण वाले हैं, उन्हें दवा से आराम हो जाएगा। लेकिन जिनके साथ लंबे समय से दिक्कत है, उनका ऑपरेशन करना पड़ेगा।
केस 1
शहर के मुडिंला की सिंपी रात में अपने सारे पसंदीदा टीवी धारावाहिक महीने पहले अचानक चक्कर आने लगा। कई अस्पतालों में इलाज कराया। कुछ दिन आराम के बाद फिर दिक्कत आ जाती थी। इस कारण वह कहीं भी अकेले नहीं जाती हैं।
केस 2
बर्डपुर के एक अधिवक्ता को स्लिप डिस्क की तकलीफ हो गई है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मोबाइल पर लाफ्टर शो लगातार देख रहे थे, जबकि उसे मोबाइल पर गेम खेलने का आदत लग गई। करीब तीन महीने पहले उसे बिस्तर से उठने व चलने में दिक्कत आने लगी। जांच कराई तो पता लगा कि स्लिप डिस्क की समस्या हो गई है।
लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल पर गेम खेलना, सोकर टीवी देखना, कुर्सी पर गलत तरीके से बैठने आदि के कारण रीढ़ की हड्डी में दिक्कत आने लगती है। स्लिप डिस्क समेत कई बीमारियां इस वजह से होती हैं। शुरुआत में ही अगर लक्षण के आधार पर इलाज हो जाए तो ठीक है, वरना कई मामलों में सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है। इधर सबसे अधिक लोग मोबाइल देखकर बीमार हो रहे हैं। ऐसे 7-8 मरीजों का ऑपरेशन होना है, जिसके लिए जरूरी जांच कराई जा रही है।
-डॉ. विमल द्विवेदी, आर्थो सर्जन