हर फसल सीजन में प्रशासन की ओर से खाद की तस्करी रोकने के लिए बनाई जाती है टाॅस्क फोर्स, फिर भी तस्कर बाॅर्डर पार कर देते हैं खाद
ई-पॉश मशीन से आधार कार्ड के जरिए खाद बेचने का नियम हवाहवाई
टास्क फोर्स में पुलिस, कृषि और राजस्व विभाग शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फसली सीजन आते ही सीमा पर खाद की तस्करी बढ़ जाती है। नतीजतन, जिले के अन्य हिस्सों में खाद की किल्लत बढ़ जाती है। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान होते हैं। प्रशासन की ओर से हर बार बाॅर्डर पर खाद की तस्करी रोकने के लिए टाॅस्क फोर्स बनाई जाती है। जैसा कि इस बार रबी फसल को देखते हुए किया गया है। नियम का झोल ऐसा है कि तस्कर उसका लाभ उठाते हैं और उर्वरक सीमा पार करके मुंहमांगी कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं।
खाद की तस्करी को रोकने के लिए जिलाधिकारी की ओर से त्रिस्तरीय टीम बनाई गई है। इसमें कृषि, राजस्व और पुलिस विभाग को शामिल किया है। साथ ही ऐसे विक्रेताओं पर प्रशासन की नजर रहेगी जो सीजन में सबसे अधिक खाद की बिक्री किए होंगे। उनके रजिस्टर को खंगाला जाएगा और गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
जनपद नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यहां तस्करों का बड़ा नेटवर्क काम करता है। ये सीजन के हिसाब से सामान की तस्करी करते हैं। अधिकांश सामान तस्करी के जरिए ही नेपाल पहुंचता है। जैसा कि मौजूदा समय में उर्वरक है। रबी के सीजन में नेपाल में डीएपी की मांग बढ़ जाती है। तस्कर कैरियर के माध्यम से खाद उठवाते हैं और गैरपरंपरागत रास्तों का प्रयोग करके सीमा पार कर देते हैं।
स्थिति यह होती है कि जिले में बुआई शुरू होने से पहले बड़ी मात्रा में खाद नेपाल पहुंच जाती है। इसके बाद किसानों को एक-एक बोरी के लिए समितियों और निजी दुकानों पर चक्कर काटने पड़ते हैं। फिलहाल, तस्करी शुरू होने के बाद प्रशासन ने इसे संज्ञान में लिया है। टाॅस्क फोर्स बनाई गई है। इसकी जिम्मेदारी है कि वह बाॅर्डर पर होने वाली खाद की तस्करी को रोके और पकड़े जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें। नियम के झोल का नतीजा है कि बाॅर्डर पर कभी तस्करी बंद नहीं होती है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। क्योंकि उन्हें महंगी दर पर खाद खरीदनी पड़ती है।
यहां से होती है गड़बड़ी
खाद की तस्करी इसलिए नहीं रुक पाती है कि विभाग के नियम में ही झोल है। ई-पॉश मशीन से खाद खरीदने का नियम लागू किया गया है। किसान बताते हुए कोई भी आधार कार्ड से अंगूठा लगाए तो उसे खाद दे दी जाती है। खाद किसे जरूरत है और कितने की जरूरत है, यह तय होता है खतौनी से, जिसकी मांग की ही नहीं जा रही है। सिर्फ आधार नंबर और किसान बताने वाले का नाम और गांव रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है। इसी का लाभ तस्कर उठाते हैं। शोहरतगढ़ के रवि ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को एक दुकान से खाद ली और खतौनी नहीं मांगी गई। हालांकि, उनके पिता के नाम से खेत है। इन नियमों में झोल के कारण तस्कर एक दिन में 50 से 100 बोरी तक खरीद कर लेते हैं। इसके बाद कैरियर के माध्यम से एक ठिकाने पर एकत्र करके रात के अंधेरे में बाॅर्डर पार पहुंचा देते हैं।
नेपाल वाली खाद पड़ती है महंगी
नेपाल के निवासी सफीकुल्लाह के मुताबिक, भारतीय डीएपी में शक्ति अधिक है। फसल में काम भी बहुत अच्छा करता है। जबकि नेपाल में बनी डीएपी में उतनी शक्ति नहीं होती है। रेट पर भारतीय मुद्रा से 2500 रुपये बोरी पड़ जाती है। भारत से तस्करों द्वारा लाई गई डीएपी अधिकतम 2000-2200 रुपये बोरी मिल जाती है। इसलिए सीमावर्ती क्षेत्र के किसान इसी खाद का प्रयोग करते हैं। मांग बढ़ने के बाद तस्कर आसानी से खाद पहुंचा देते हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं पर प्रशासन की रहेगी नजर
खाद की तस्करी को रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के खाद की दुकानों पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। इन दुकानदारों को खतौनी और जोतबही देखने के बाद ही खाद का वितरण करना होगा। इसके साथ ही रजिस्टर में खतौनी और जोतबही का नंबर दर्ज करना होगा। ताकि यह पता चल सके कि किसान ले गया है या फिर कोई तस्कर खाद उठा ले गया। प्रशासन की टीम लगातार भ्रमण करके दुकानदारों की जांच करती रहेगी।
सीमावर्ती थानों की जवाबदेही होगी तय
तस्करी रोकने के लिए बाॅर्डर क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार के अलावा थाना और पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिस टीम भी अलर्ट रहेगी। वह हर आने-जाने वालों पर नजर रखेगी। उर्वरक लेकर जाते हुए पकड़े जाने वालों पर कार्रवाई करेगी। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में कृषि विभाग की ओर से स्टाॅक की जांच के निर्देश हुए हैं।
नेपाल पहुंचते ही इतनी महंगी हो जाती है खाद
जनपद में समिति और उर्वरक विक्रेताओं के यहां 1350 रुपये प्रति बोरी डीएपी की कीमत तय की गई है। लेकिन यही खाद सीमा पार होते ही 2000-2200 रुपये प्रति बोरी 50 किलो बिकती है। यानी 800-900 रुपये बोरी तस्कर कमाते हैं।
बोले अधिकारी
सीमा पर खाद की तस्करी को रोकने के लिए टाॅस्क फोर्स बनाई गई है। टीम समय-समय पर विक्रेताओं के यहां उर्वरक के स्टाॅक की जांच करती रहेगी। साथ ही सीमावर्ती पुलिस भी जांच करेगी। खाद की कालाबाजारी करते हुए पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी