सिद्धार्थनगर। जिन हाथों में कलम और कॉपी होनी चाहिए, उन हाथों में शराब की बोतल से भरे झोले और तस्करी के लिए साइकिलें थमाई जा रहीं हैं। भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी में लिप्त देश विरोधी तत्व सख्ती बढ़ने के बाद बच्चों को मोहरा बना करकर उन्हें जरायम की दुनिया में धकेल रहे हैं। ये बच्चे जब पकड़े जाते हैं तो इन्हें समझाकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन, तस्करों ने ऐसे कई बच्चों का गिरोह तैयार कर रखा है जो सीमा के इसपार से उसपार सामानों की तस्करी कर रहे हैं। ये नाबालिग थोड़ा-थोड़ा करके कई बार चक्कर लगाकर बड़ी मात्रा में सामान ठिकाने तक पहुंचा देते हैं। पिछले कुछ दिनों की भीतर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई इस बात को पुख्ता कर रही है।
भारत- नेपाल के बी रोटी-बेटी का रिश्ता है, जिले से लगने वाली 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई। जिसका देश विरोधी तत्व हमेशा फायदा उठाने की फिराक मेें रहते हैं। इसमें तस्करों की भूमिका अहम रहती है। ये दोनों देशों के बीच जब जिस वस्तु की मांग अधिक होती है, उसी सामान को इस पार से उस पार करने में जुट जाते हैं। इसमें मादक पदार्थ के साथ ही सोना-चांदी, उर्वरक, डीजल-पेट्रोल यहां तक की चावल-गेहूं की तस्करी भी की जाती है।
मौजूदा समय में अनाज, उर्वरक और शराब की तस्करी ने जोर पकड़ा है। लगातार कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के सख्त होने के बाद तस्करों ने अब बच्चों का सहारा लेने शुरू कर दिया है। चंद रुपये का लालच देकर उन्हें इस धंधे में ला रहे हैं। जिन हाथों में कंधों पर स्कूली बैग होना चाहिए, उन पर शराब से भरा बैग और साइकिल पर खाद व अनाज थमा रहे हैं। मौजूदा समय में सीमा पर तस्करी में सबसे अधिक बच्चे उपयोग किए जा रहे हैं।
उधर से शराब, इधर से गेहूं और खाद ले जाते हैं बच्चे
नेपाल में देसी शराब यहां की तुलना में 15 रुपये बोतल तक सस्ती है। कैरियर ग्राहक सेट करके रखते हैं। आर्डर के हिसाब से 20 से 50 बोतल शराब देकर भेजते हैं। इधर गेहूं की बोरी और उर्वरक तैयार रहता है। उसे साइकिल पर लादकर बच्चे और किशोर ठिकाने पर पहुंच देते हैं।
शराब की बोतल और बोरी के हिसाब से मिलते हैं रुपये
तस्कर बच्चों को शराब की प्रति बोतल के हिसाब से दो या तीन रुपये देते हैं। जबकि खाद पर डीएपी पर दो सौ रुपये बोरी और यूरिया पर सौ रुपये बोरी देते हैं। उनका काम बस इतना है कि यहां से उठाना और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचकर वहां पर पहुंचा देना। जितना चक्कर, उतने रुपये मिलते हैं।
चेतावनी देकर छोड़ देते हैं सुरक्षाकर्मी
तस्करी के इस धंधे मेें 13-16 साल तक के बच्चों को उपयोग करते हैं। जो बेहिचक बोल सकें, बताए हुए स्थान पर जा सकें। उन्हें ही तस्कर चुनते हैं। सूत्रों के अनुसार बच्चा देखकर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिसकर्मी भी रहम कर देते हैं। पकड़े जाने पर खाद को खेत में डालने और गेहूं को खाने की बात करके सुरक्षा कर्मियों से मिन्नत करने लगते हैं। जिससे वह द्रवित होकर छोड़ देते हैं। सीमा पर काम करने वाली एक एजेंसी कर्मी ने बताया कि बच्चों को जब रुपये मिलना शुरू होता है तो वह धंधे को छोड़ नहीं पाते हैं। उन्होंने बताया कि कई ऐसे केस सामने आए, जिसमें पकड़े जाने के बाद समझाकर छोड़ दिया गया। लेकिन फिर बच्चा, उसी कार्य को शुरू कर देता है। यह लत जैसा हो जाता है।
शराब के साथ पकड़ा गया नाबालिग
अप्रैल माह में ककरहवा बार्डर पर एसएसबी ने एक 14 साल के लकड़े को पकड़ा। उसके झोले से 30 शीशी नेपाली शराब बरामद हुई। पूछताछ में उसने बस इतना ही बताया कि नेपाल से लाकर एक स्थान पर देने के एवज में उसे रुपये मिलते हैं। वह एक दिन में चार से पांच चक्कर नेपाल से लगा लेता है। नाबालिग होने के कारण लिखा पढ़ी करके परिवार को सुपुर्द किया गया।
नेपाल पुलिस को सुपुर्द किया
मई माह में ककरहवा बार्डर पर चेकिंग के दौरान एक नाबालिग लड़की 41 शीशी नेपाली शराब के साथ पकड़ी गई थी। पूछताछ में पता चला कि लड़की नेपाल की रहने वाली है। नाबालिग होने के चलते सीमा पर कार्य करने वाली एक संस्था की मौजूदगी में लिखापढ़ी करके नेपाल पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया।
डीएपी के साथ पकड़ा गया नाबालिग
दो दिन पहले ककरहवा बार्डर पर एसएसबी जवानों ने डीएपी खाद लेकर नेपाल सीमा में प्रवेश करते हुए कुछ बच्चों को देखा। जवानों को देखकर अन्य तो नेपाल सीमा में प्रवेश कर गए। जबकि एक पकड़ा गया। मौके से 10 बोरी डीएपी पकड़ी गई। पूछताछ में पकड़ा गया नाबालिग लड़का नेपाल का निवासी पाया गया। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और एक संस्था की ओर से समझाकर बुझाकर लिखापढ़ी करके नेपाल पुलिस की मदद से परिवार को सुपुर्द कर दिया गया। वहीं बरामद खाद कस्टम को सुपुर्द कर दिया गया।
जबतक कोई जघन्य अपराध जैसे हत्या, दुष्कर्म की घटना न की हो, किसी नाबालिग के खिलाफ न तो केस दर्ज किया जा सकता है और न ही उसे जेल भेजा सकता है। छोटे अपराध खाद के साथ, नेपाल शराब के साथ पकड़े जाने। ऐसे अपराध में पकड़े जाने के बाद बच्चों समझाया जाता है। बाल कल्याण समिति की ओर से उन्हें समझा बुझाकर परिवार को सौंपा जाता है। अगर जघन्य अपराध करता है तो भी उसे बाल न्यायालय में उपस्थित किया जाता है। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होती है।
- संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर
सीमा सीमावर्ती थानों की पुलिस अलर्ट रहती है। तस्करी रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी कार्य कर रहे हैं। कार्रवाई भी लगातार जारी है। रही बात बच्चों के पकड़े जाने की तो उसने में भी लिखापढ़ी होती है। इसके बाद संबंधित परिवार को बच्चों को सुपुर्द किया जाता है। जिससे वह फिर इस प्रकार के अपराध में लिप्त न हों।
- अमित कुमार आनंद, एसपी, सिद्धार्थनगर