सिद्धार्थनगर। साहब! नशेड़ी हो गया बेटा, संपत्ति बर्बाद कर रहा। यह कहना है माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नशामुक्ति केंद्र में आने वाले नशेड़ियों के परिजनों का। नशामुक्ति केंद्र में मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास इस प्रकार के चार से पांच रोगी हर दिन पहुंच रहे हैं। अस्थायी रूप से मानसिक रोग विशेषज्ञ के कक्ष में 12 दिन से नशामुक्ति केंद्र शुरू हुआ है। इसके बाद से नशा छुड़ाने के लिए कोई पति तो कोई बेटा और अन्य रिश्तेदारों को लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक काउंसिलिंग करने के साथ ही दवा भी दे रहे हैं। जिससे नशे की लत से मुक्ति मिल सके।
युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है। कम उम्र में ही कोई शराब तो कोई गांजा, भांगा, चरस, सिगरेट का आदि हो जा रहा है। युवी पीढ़ी नशे की गिरफ्त में न आए और अगर जाता है तो उसका समय से इलाज हो सके। इसके लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से नशामुक्ति केंद्र खोला गया है। 12 दिन पहले ही इस केंद्र का उद्घाटन हुआ है। अस्थाई रूप से मानसिक रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के कक्ष में यह संचालित हो रहा है। पहले लोग गोरखपुर, लखनऊ सहित अन्य केंद्र पर इलाज के लिए जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे जानकारी हो रही है तो लोग माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक के मुताबिक 25-30 की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें पांच से छह मरीज नशे की लत वाले आ रहे हैं। जिनकी काउंसिलिंग के साथ ही इलाज भी किया जा रहा है। जिससे जल्द से जल्द नशे की लत से दूर हो जाएं।
नशा छुड़ा दीजिए, बहुत परेशान हैं
इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक महिला अपने 25 वर्षीय बेटे को लेकर चिकित्सक के पास पहुंची थी। उसने कहा कि बेटा कुछ लोगों के संगत में पड़ गया और हमेशा नशा करता है। इसमें संपत्ति का नुकसान कर रहा है। साहब नशा छुड़ा दीजिए, बहुत परेशान हैं। चिकित्सक ने दवा के साथ ही काउंसिलिंग तरीका बताया।
साहब नहीं छूट रही नशे की लत
नगर का ही रहने वाला एक युवक चिकित्सक के पास पहुंचा और बोला कि साहब शराब की लत लग गई है। इससे छोडऩा चाहते हैं, लेकिन छूट नहीं रहा है। शराब की वजह से परिवार और रिश्तेदारों से दूर होते जा रहे हैं। शराब की तलब छूट नहीं रही है। कोई उपाय और दवा दे दीजिए। चिकित्सक ने कुछ सलाह दिया। ऐसे न जाने कितने लोग पहुंच रहे हैं।
नशे की लत वालों का मुख्य पहचान
अकसर रात में देर से घर आना और कारण पूछने पर बहाना बनाना, अकसर देर देर तक बिना किसी कारण के घर से बाहर रहना। अनियमित दिनचर्या जैसे सोने, खाने एंव नहाने में रुचि न होना। व्यापार के नुकसान के कारणों को छिपाना। स्कूल या अन्य कार्यों की क्षमता में कमी आना। बिना उचित कारण आफिस या अन्य कार्य में समय से अनुपस्थित रहना या रुचि नहीं रखना आदि कारण है।
नशे की लत आसानी से छूट सकती है। बसर्ते इस पर परिवार को ध्यान देने की जरूरत है। नशे की लत के मरीज पहुंच रहे हैं। उनकी काउंसिलिंग करने के साथ ही जरूरत के अनुसार दवा दी जाती है।
-मो. अफजल, सहायक आचार्य मानसिक रोग विभाग और नोडल नशामुक्ति केंद्र