डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम की ओर से अशरे की छठवीं मजलिस रविवार की रात आयोजित की गई। इसमें ईरान के कुमम से आए मौलाना सैय्यद जमीर अब्बास जाफरी ने मकसदे हुसैन और दीने इस्लाम की विशेषताएं बताई। उन्होंने इमाम हुसैन के पैगाम को दुनिया तक पहुंचाने और नेकी, भलाई और सच्चाई के रास्ते पर हमेशा चलते रहने की लोगों से अपील की।
मौलाना जमीर अब्बास जाफरी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत ने हक पसंदों ( विश्वासियों) के दिलों में ऐसी गर्मजोशी पैदा की है कि यह कभी ठंडा नहीं हो सकता। उन्होंने इमाम हुसैन के गुणों का वर्णन किया और कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपने परिजनों और साथियों जिनकी कुल तादाद सिर्फ 72 थी। यजीद के लाखों के लश्कर से मुकाबला करके और अपनी कुर्बानी देकर यजीद के हठधर्मिता के मिशन और अन्याय का खात्मा किया। दीने इस्लाम और मानवता, इंसानियत और सच्चाई को जिंदगी दे दी। मौलाना ने बताया कि इमाम हुसैन ने अपने प्रियजनों को इस्लाम के सिद्धांतों पर हमेशा कायम रहने का आदेश दिया। मौलाना ने इमाम हुसैन की महानता का वर्णन करते हुए कहा कि हुसैन मार्गदर्शन और जहान का दीपक हैं। जहां अंधेरा है वहां यह दीपक रोशनी फैलाएगा। हम सभी जानते हैं कि अंधेरे में दीपक से तभी फायदा हो सकता है, जब दीपक सामने हो, उसी तरह अगर किसी को इमाम हुसैन से मार्गदर्शन प्राप्त करना है तो उसे हुसैन का अनुसरण करना होगा ।
मौलाना ने कहा कि मजलिसों के जरिए इमाम हुसैन के पैगाम को आम किया जाता है। इस दौरान अंजुमन फरोग मातम के मोहम्मद मेंहदी, सेक्रेटरी तसकीन हैदर, तसबीब हसन, मौलाना महफूज, निहाल मौलाना, कसिम रिजवी, काजिम कर्बलाई, कैफी रिजवी, जुहेर, कामयाब मास्टर, जानशीन हैदर, जइम अब्बास आदि मौजूद रहे।