संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर चिंतन की प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान हुआ। इसमें डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारत की अस्मिता के प्रतीक हैं। उनका जीवन व्यक्तित्व कृतित्व आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए दीनदयाल उपाध्याय का जीवन न केवल प्रेरणादायी है, अपितु आदर्श पुरुष के रूप में उनका व्यक्तित्व समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी भी है। विपरीत परिस्थितियों में चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर उच्चतम की ओर प्रगति बढ़ते हुए लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसका बहुत स्पष्ट संदेश दीनदयाल का जीवन इतिहास हम सबको देता है।
कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा की दीनदयाल उपाध्याय भारत के महापुरुषों की शृंखला में एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर के रूप में सर्वकालिक रूप से विद्यमान हैं। दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारत की संस्कृति सर्व हिताय सर्व सुखाय की अवधारणा को आत्मसात करने की है। उनके चिंतन में सृजनात्मक एवं रचनात्मक समाज के निर्माण की अवधारणा निहित है। राष्ट्र निर्माण के संबंध में दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज और भी प्रासंगिक है।
इस दौरान डॉ. सच्चिदानंद चौबे, डॉ. प्रदीप पांडेय, डॉ शिवम शुक्ला, डॉ. रेनू त्रिपाठी, डॉ. आभा द्विवेदी मौजूद रही।