ककरहवा। सर्वोदय शांति पद यात्रा के अंतर्गत जैन धर्म के प्रख्यात वाचनाचार्य डॉ. मणिभद्र की ऐतिहासिक पदयात्रा शुक्रवार को भारत नेपाल सीमा स्थित ककरहवा बॉर्डर पहुंची। पोखरा (नेपाल) से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा छत्तीसगढ़ के दुर्ग तक कुल 1150 किलोमीटर की दूरी वह पैदल तय करेंगे। ककरहवा सीमा पर पहुंचते ही जैन समाज के अनुयायियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों ने डॉ. मणिभद्र का पुष्पवर्षा एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विधिवत स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। वाचनाचार्य डॉ. मणिभद्र ने अपने संदेश में कहा कि यह पदयात्रा विश्व शांति, अहिंसा, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। वैमनस्य से दूर रहकर शांति और नैतिकता के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।