इटवा। मथुरा हाईवे पर हुए भीषण हादसे के 18 लोगों की मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। आज भी धड़ल्ले से दिल्ली से आ रही बसों में बड़े पैमाने पर ज्वलनशील पदार्थों की ढुलाई की जा रही है। इसके चलते यहां कभी भी कोई अनहोनी से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इटवा तहसील क्षेत्र की बड़ी आबादी मुम्बई व दिल्ली के शहरों में रोजी-रोटी के लिए रहती है। इसमें कुछ लोगों ने वहां अपना आशियाना बना लिया है तो कुछ किराये के मकान में रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं। ऐसे लोगों में अधिकांश का आना-जाना इन्हीं दिल्ली-मुंबई से चलने वाली प्राइवेट बसों से ही होता है। इन महानगरों में दिल्ली से चलने वाली बसों में सवारियों से अधिक सामानों की ढुलाई होती है। इनमें लुब्रिकेंट ऑयल, ऊनी कपड़े, मशीनरी कलपुर्जे आदि होते हैं। यह सभी सामान बसों के नीचे व इंजन के पीछे बनाए गए तहखानों में लोड होते हैं जो दिल्ली से जनपद की सीमा में बेवां, डुमरियागंज, रगड़गज के सेरा चौराहे, इटवा, सेमरी, कठेला आदि बाजारों में अनलोड होता है। इटवा कस्बे के व्यापारी मुन्ना बताते हैं कि यह सभी सामान मोबाइल फोन से नोट करा दिए जाते हैं और दुकानदार की बताई धनराशि को प्राइवेट बसों के परिचालकों को दे दिया जाता है। यह परिचालक वहां व्यापारियों को धनराशि देकर दिए गए सामानों को बसों के तहखाने में लोड करा लेते हैं। इसके बाद परिचालक बसों में रखे सामानों के दुकानदारों से संपर्क करते हुए उनके दुकानों पर उतारते हुए चले जाते हैं। इटवा कस्बे के निवासी इमरान अली कहते हैं कि प्रशासन को इन बसों पर ज्वलनशील पदार्थों की ढुलाई पर रोक लगानी चाहिए। गनवरिया पूरब निवासी पवन अग्रहरि कहते हैं कि बसों में यात्रियों के आवश्यक सामानों के अलावा फालतू सामानों की ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।
बहरहाल प्रशासन दिल्ली से आने वाली लग्जरी बसों से हो रही अवैध ढुलाई पर अंकुश लगाएगा अथवा मथुरा हाईवे पर हादसा होने की प्रतीक्षा करेगा।