बिस्कोहर। नगर के फूलपुर राजा में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार की रात को आचार्य रामजस ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि गुरु के साथ कपट और मित्र के संग चोरी करने वाला दरिद्र हो जाता है और उसे कुष्ठ रोग हो जाता है। आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान सुदामा ने अपने मित्र कृष्ण की नजर बचाकर गुरु के दिए चने अकेले ही खा लिए, जिससे वह दरिद्रता को प्राप्त हुए। सुदामा ने एक दिन पत्नी को अपनी और भगवान कृष्ण की दोस्ती के बारे में बताया तो सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण जी के पास जाकर जीवन निर्वाह के लिए कुछ धन लाने को कहा। द्वारिकापुरी में भगवान कृष्ण ने बचपन के मित्र सुदामा की खूब खातिरदारी की और सुदामा के प्रेम में मगन होकर आंसुओं से उनके पैर धो डाले। इसके बाद भगवान ने सुदामा को अलौकिक वरदान देकर घर भेजा।