इटवा। विकास खंड खुनियांव के ग्राम सड़वा में कथा के सातवें दिन बुधवार की रात में स्वामी उत्तम कृष्ण शास्त्री से गोपी उद्धव संवाद व श्रीकृष्ण-रूक्मिणी विवाह की कथा सुनाई, जिसे सुनकर श्रोता खुशी से झूम उठे। उत्तम कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कि रास का अर्थ आत्मा-परमात्मा का मिलन, भक्त भगवान का मिलन व जीव परमात्मा का मिलन होता है। उन्होंने कहा कि उद्धव बृहस्पति के शिष्य ब्रह्म ज्ञानी थे। ज्ञान का अभिमान था। इसी कारण भगवान ने उन्हें दिल से अपना नहीं बनाया। ज्ञान का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को वृंदावन में भेजा। वृंदावन में जाकर के उद्धव के समस्त ज्ञान दूर हुए और ज्ञानी उद्योग प्रेमी उधव बन गए। कथावाचक ने कहा कि कंस वध करने के बाद भगवान गुरुकुल पढ़ने गए। वह 14 वर्ष तक मथुरा में रहे। इसके बाद द्वारिका पुरी नगर का निर्माण करके भगवान द्वारकाधीश बने और रूक्मिणी के साथ विवाह किया।