बिस्कोहर। नगर के गोविंद नगर मधवापुर में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा और हनुमान मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे दिन शुक्रवार रात को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा व्यास सरजू प्रसाद वानप्रस्थी ने विभिन्न पौराणिक कथाओं के वृत्तांत सुनाकर श्रद्धालुओं के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं को शांत किया और उन्हें सत्कर्म और जनकल्याण के रास्ते पर चलते हुए प्रभु भक्ति के कार्य करते हुए जीवन व्यतीत करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि बिना धर्म और संस्कार के मनुष्य योनि व्यर्थ है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को मनुष्य योनि में आने का अवसर मिलता है, जहां जीव अपने तन और मन से सत्कर्म करते हुए ईश्वर को प्राप्त करने का सामर्थ्य प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि में आकर सब कुछ जानते हुए भी अगर मनुष्य अज्ञानता की भंवर में गोता लगाता रहे तो उसका जीवन बेकार है। इसलिए, हमेशा सत्कर्म के मार्ग पर चलते हुए ईश्वर का स्मरण करते रहें।