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Siddharthnagar News: पिछड़े तहसील मुख्यालय से आधुनिक शहर बनने को अग्रसर सिद्धार्थनगर

Fri, 29 Dec 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। स्थापना के समय पिछड़े तहसील मुख्यालय की पहचान रखने वाला जिला अब धीरे-धीरे आधुनिक शहर बनने की तरफ अग्रसर है। 29 दिसंबर 1988 को बस्ती से अलग होकर नया जिला बनने के 35 वर्ष बाद सिद्धार्थनगर कुछ अड़चनों के बावजूद हर दिन विकास की नई ऊंचाई छू रहा है। जिले की स्थापना पर 35 वर्ष के सफर पर अमर उजाला की एक नजर।
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स्थापना के समय कुछ कपड़े, किराना व मेडिकल स्टोर की दुकानों के साथ एक किमी दायरे में सिमटा कस्बा ही जिला मुख्यालय की पहचान थी। गोरखपुर और बस्ती की तरफ से यहां तक आने वाले सकरे मार्ग किनारे वर्तमान बसावट नदारत थी। यहां तक कि तत्कालीन नगर पंचायत के दायरे से बाहर ग्रामीण क्षेत्र में कलक्ट्रेट, विकास भवन समेत अन्य सरकारी कार्यालयों का निर्माण हुआ, जो अब जाकर शहरी क्षेत्र में शामिल हो सका है। अब आठ किमी से अधिक दायरे में आधुनिकता की सभी सुविधाएं समेटे नया शहर विकसित हो रहा है। जिले में अच्छे होटलों है तो दस मॉल भी बन गए हैं।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय बनी नई पहचान
बुद्ध भूमि कपिलवस्तु में आठ वर्ष पूर्व सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जिले में नया प्रतिमान गढ़ दिया गया। इससे पहले यहां के गिने चुने महाविद्यालय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध थे। अब इस विश्वविद्यालय से छह जिले के ढाई सौ से अधिक महाविद्यालय व पीजी कॉलेज संबद्ध है। इससे जिले को नई पहचान मिली है।
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मेडिकल कॉलेज से दुरुस्त हुई स्वास्थ्य सुविधा
तीन वर्ष पूर्व स्थापित हुए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया। इससे पूर्व यहां जिला अस्पताल स्तर की ही स्वास्थ्य सुविधा मुहैया थी। सरकारी व्यवस्था के अलावा जिले में उच्च स्वास्थ्य सुविधा वाले कई निजी चिकित्सालयों का भी निर्माण हुआ है।
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कालानमक चावल को मिला पीएम अवार्ड
जिले की ओडीओपी घोषित हुए कालानमक चावल के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर जिला प्रशासन को तीन वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री अवार्ड मिला था। तत्कालीन डीएम दीपक मीणा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरस्कृत किया था। वैसे तो जिले के तराई क्षेत्र में कालानमक धान की पैदावार होती थी, लेकिन पिछले वर्षों में शासन की पहल से इसकी खेती के लिए किसानों की सुविधाएं बढ़ी है।
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आमान परिवर्तन से बढ़ी आवागमन सुविधा
छोटी रेल लाइन से बड़ी लाइन में परिवर्तन से अब यहां के लोगों को सीधे लखनऊ, दिल्ली, मुंबई समेत अन्य बड़े शहरों तक ट्रेन पकड़ने की सुविधा मुहैया हो रही है। इससे पहले लोग यहां से गोंडा और गोरखपुर जाकर ट्रेन बदल दूसरे शहर जाते थे। इसके साथ नौगढ़ का नाम बदल सिद्धार्थनगर बने रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का भी विकास हुआ है। अमृत भारत-2 योजना में शामिल सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन की तस्वीर बदली जा रही है।
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शहर में खड़े हो गए माल, होटल व अस्पताल
तेजी से विकसित हो रहे शहर में पिछले कुछ वर्ष में ही चार से अधिक माल बन गए है, साथ ही 14 से अधिक ठहरने वाले होटल के साथ बैठने और खाने के कई होटल तैयार हो गए है। इसके अलावा कई वाहन एजेंसियां, कई बड़ी कंपनियों के रेडीमेड कपड़े और लक्जरी सामग्रियों की दुकानें भी खुल गई है। साथ ही शहर के निजी अस्पतालों की कतार लग गई है।
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दो एनएच के साथ बना ओवरब्रिज
जिले में दो एनएच है, जिसमें ककरहवा से बांसी होते बस्ती जाने वाले एनएच का निर्माण पूर्ण होने के साथ ही ओवरब्रिज का भी निर्माण होने आवागमन दुरुस्त हुआ है। इसके अलावा गोरखपुर से शोहरतगढ़ तक एनएच निर्माणाधीन है। साथ ही कई सकरे मार्ग की जगह चौड़ी सड़कें बननी शुरू हुई, जिससे आवागमन सुविधा धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।

जनपद को मिल रहा नया आयाम
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना एवं शहर के बुद्ध विद्या पीठ कॉलेज के पीजी बनने से जनपद निर्माण के साथ ही विकास के लिए संघर्ष करने वाले पं. रामशंकर मिश्र का सपना साकार हो रहा है। शैक्षिक सुविधाओं के विकास से जिले के युवाओं को सहूलियत मिलेगी।
-राजेश शर्मा, प्रबंधक बुद्ध विद्या पीठ पीजी कॉलेज
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जनपद स्थापना के बाद से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवहन सुविधाओं के विकास से इस पिछड़े जिले की पहचान बदल रही है। शहर में दुकानों व अन्य आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता लोगों को यहां रहने के लिए आकर्षित कर रही है, उम्मीद है कि आगे और बेहतर होगा।
-प्रहलाद जायसवाल, अध्यक्ष टैक्स बार एसोसिएशन

कपिलवस्तु में आज होगा स्तूप पूजन
जनपद के स्थापना दिवस पर 29 दिसंबर को सुबह नौ बजे से साड़ी तिराहे पर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के माल्यार्पण से प्रारंभ होकर सिद्धार्थ तिराहा, बर्डपुर तिराहा तथा कपिलवस्तु स्थित स्तूप पर माल्यार्पण एवं पूजन का कार्यक्रम होगा। इसके बाद दोपहर तीन बजे लोहिया कलाभवन में जनपद स्थापना के 35 वर्ष पूर्ण होने पर विकास यात्रा के 35 वर्ष विषयक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
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सिद्धार्थनगर में सभी क्षेत्रों में विकास कार्य हो रहा है। चिकित्सा शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के अलावा पर्यटन, परिवहन, खेल, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर कार्य हो रहा है। कालानमक चावल के साथ मछली पालन भी जिले की पहचान बन रहा है। जो विकास कार्य शुरू हुए हैं, उन्हें पूरे होने पर सुविधाएं और बेहतर होंगी।
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-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी
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