फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: नशे के धंधे का केंद्र बना सिद्धार्थनगर

विज्ञापन
विज्ञापन
- पहले नेपाल, अब बिहार, उड़ीसा व बंगाल के मादक पदार्थ के तस्कर जमा लिए पांव
विज्ञापन

- नेपाल से चरस, अफीम व गांजे की आती है खेप, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल से बिहार के तस्कर ला रहे गांजा

- बड़े तस्कर लगे हाथ, अभी करियर के नेटवर्क को तोड़ना पुलिस के लिए चुनौती

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। जनपद नशे के धंधे का केंद्र बन रहा है। नेपाल से गांजा, चरस और अफीम तस्कर ला रहे थे। अब बिहार के तस्करों ने जाल फैला लिया है। बड़ी मात्रा में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा से गांजा लाकर बेच रहे हैं। बांसी कोतवाली क्षेत्र में पकड़ी गई गांजा खेप इस बात की गवाही दे रही है कि नेपाल के अलावा बिहार के तस्करों का गैंग यहीं लाकर मादक पदार्थ को खपा रहा है। तस्कर तो पकड़ लिए गए हैं, लेकिन गली मोहल्लों तक पैठ बना चुके कैरियर तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है। हालांकि विभाग के जिम्मेदार पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए जांच की बात कर रहे हैं।

जिले की सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। पांच थाना क्षेत्रों की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। सीमा खुली होने का तस्कर लाभ उठाते हैं। चावल, गेहूं, खाद्य पदार्थ, सोना, चांदी और सब्जी की तस्करी सीजन और मांग के हिसाब तस्करी होती है, लेकिन मादक पदार्थ की तस्करी हमेशा होती है। इसमें गांजा और चरस अकसर पकड़ा जाता है और नेपाल से लाने के बाद सामने आती है। कई बार अफीम और हेरोइन भी पकड़ा जाता है। नेपाल से होने वाली मादक पदार्थ की तस्करी से हर कोई वाकिफ था, लेकिन बिहार के तस्करों का गैंग जनपद में पांव पसार चुका है। पुलिस भी इससे अनजान थी।
विज्ञापन

बीते दो माह में गांजा पकड़े जाने के कई मामले आए, लेकिन मात्रा आधा किलो तक रहता था, लेकिन एसओजी और बांसी पुलिस की ओर से बांसी क्षेत्र में 26 जनवरी को तस्करों के बड़े गिरोह को पकड़ा। उनके कब्जे से 33 किलो गांजा बरामद किया गया। इस गिरोह के पकड़े जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जनपद मादक पदार्थ के तस्करों का केंद्र बन चुका है। जिसे तोड़ना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। फिलहाल पुलिस विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह के साथ काम करने वाले कैरियर भी पकड़े जाएंगे।

-

स्काॅर्पियो में माल, स्कूटी से डिलीवरी

सूत्रों के अनुसार पकड़े गए तस्करों का संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बरामलपुर, गोंडा, बाराबंकी और लखनऊ तक नेटवर्क फैला है। स्काॅर्पियो में गांजा रखकर चलते हैं, जिससे किसी को शक न होने पाए। पीछे- पीछे एक दो पहिया वाहन रहता है। कैरियर के मिलने के बाद उसी दो पहिया वाहन से डिलीवरी देकर रुपये ले लिए जाते हैं।

-

कैरियर 500 ग्राम व एक किलो खरीदते हैं माल

इस गिरोह से गांजा खरीदने वाले कैरियर की क्षमता 500 से ग्राम से एक किलो तक है। यह इतना माल खरीदने के बाद, उसकी छोटी-छोटी पुड़िया बनाते हैं। इसमें भांग मिलाते हैं, जिससे यह और तेज होता है। 50 रुपये से 150 रुपये तक पुड़िया बिकती है। भांग और कुछ अन्य मादक पदार्थ मिला देने के बाद चिप्पड़ के नाम से इसे बेच जाता है। खरीदकर पीने वाले एक व्यक्ति ने प्रति पुडि़या के दाम के बारे में जानकारी दी। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जहां पुलिस जाने से परहेज करती है। कुछ धार्मिक स्थल पर रहने वाले लोग इस धंधे को संचालित करते हैं।

-

बढ़नी बाॅर्डर से नशे का कारोबार

ढेबरुआ थाना क्षेत्र का बढ़नी बाॅर्डर मादक पदार्थ की तस्करी के लिए सुगम माना जा रहा है। दिसंबर में ढेबरुआ पुलिस ने स्मैक, गांजा और नशीली गोली के साथ कुछ चार लोगों को पकड़ा। इसी प्रकार इटवा पुलिस ने चरस के साथ दो माह के भीतर तीन लोगों को पकड़ा। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि बढ़नी बाॅर्डर तक नेपाल से लोग लाते हैं। इसके बाद सीमा पार मिलने के बाद वह तय स्थान पर लेकर जाकर बेचते हैं। एक वर्ष में इसी बाॅर्डर से मादक पदार्थ की तस्करी के 20 मामले पकड़े में आ चुके हैं। इसमें नेपाल शराब भी शामिल है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की आंख से बचकर न जाने कितनी मात्रा में निकलता होगा। इसका पता नहीं है। इसी प्रकार बजहा से अलीगढ़वा बाॅर्डर नेपाल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बजहा से अलीगढ़वा बाॅर्डर पर नेपाल मेें प्रतिबंधित दवाएं बड़ी मात्रा में जाती हैं। इसके साथ ही उधर से चरस और गांजा आता है।
विज्ञापन


-

बोले अधिकारी

तस्करों के नेटवर्क को पुलिस टीम खंगाल रही है। कहां से कहां तक लोग जुड़े हुए हैं। इसके बारे जानकारी ली जा रही है। इसमें संलिप्त मिलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

-सिद्धार्थ, अपर पुलिस अधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें