सिद्धार्थनगर। जिस पिता ने स्मृता को गोद में खिलाया था, झूठी शान में उसने चाकू से गोदकर मार डाला। जब लाश को कंधा देने की बारी आई तो सलाखों के पीछे जा चुका था। वहीं मां को भी स्मृता के जाने का कतई दुख नहीं था, बल्कि उसके प्रति उसके मन में आक्रोश था। क्योंकि उसकी वजह से पति जेल गया। उसे पति के जेल जाने का गम जरूर था। जो रविवार शाम को उसके चेहरे पर साफ दिखाई दिया। रात गांव के लोग और रिश्तेदारों ने मिलकर बगल से ही गुजरने वाली राप्ती नदी के तट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। यहां पर भी वह मां आक्रोश और गम अग्नि में जली। क्योंकि उसके प्रति किसी को संवेदना नहीं थी। ऐसा प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था।
खेसरहा थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव के पघटिया टोला निवासी स्मृता की शनिवार को गांव से एक किलोमीटर दूर नदी में बोरे में बंधी लाश मिली थी। उसकी बेहरमी से हत्या की गई थी। गला रेतने के साथ ही उसका पूरा पेट फाड़ दिया गया था। यह कृत्य को किसी गैर ने नहीं, बल्कि उसके पिता राधेश्याम ने की थी। उसमें उसके बाबा और गांव का ही एक शख्स शामिल था। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मां की सुपुर्दगी में शव को अंतिम संस्कार के लिए दिया। आनन-फानन में उसे जलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। बेटी को कांधा देने वाला कोई नहीं था। रिश्तेदार के लोग उसके कांधा देकर गांव के बगल से गुजरने वाली नदी पर ले गए, जहां उसकी अंतिम संस्कार हुआ। मामा के लड़के ने उसे मुख अग्रि दी।