सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के शोधार्थियों की कार्यशाला को संबोधित करते प्रोफेसर सुशील कु
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बृहस्पतिवार को आयोजित परिसर के शोधार्थियों की कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के विशेष कार्य अधिकारी एवं शोध समन्वय प्रोफेसर सुशील कुमार तिवारी ने कहा की शोध की गुणवत्ता में विषय का चयन गंभीरता पूर्वक कार्य शोध का सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान है। शोध प्रबंध का विषय एवं कार्य ऐसा हो जिसकी उत्पादकता एवं महत्व शोध वास्तविक धरातल पर से संबंधित कार्यों को प्रमुखता के साथ करना चाहिए।
उच्च कोटि के शोध के लिए प्रतिष्ठित साहित्य का गहन अध्ययन बहुत आवश्यक है। तुलनात्मक दृष्टि और शोधार्थी को शोध निर्देशक की योग्यता का अधिकतम लाभ लेने की प्रवृत्ति में होना चाहिए। नियमित समय में प्रबंध को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। शोध निर्देशक की भी भूमिका शोधार्थी के गुणवत्तापूर्ण शोध में महत्वपूर्ण होती है।
अधिष्ठाता कला संकाय के प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षक और छात्र की भूमिका राष्ट्र के उत्थान में सर्वाधिक है। शिक्षा में गुणवत्ता से राष्ट्रीय विकास का आधार तैयार किया जा सकता है। इनमें शोध और शोधार्थी की भूमिका भी सर्वाधिक है। शोध निर्देशक के साथ लगातार संवाद से उच्च कोर्ट का शोध प्रबंध तैयार होने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। नियमित और निरंतर शोध कार्य भारत के भविष्य की उपलब्धि में भी महत्वपूर्ण है, शोधार्थी स्नातक एवं स्नातक उत्तर के विद्यार्थियों का शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सहयोग कर सकते हैं। शोधार्थियों को संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए।
इस दौरान पर डॉ, नीता यादव, डॉॅ सुनीता त्रिपाठी, डॉ सच्चिदानंद चौबे, डॉ सत्येंद्र दुबे, डॉ प्रदीप पांडेय, डॉ जय सिंह यादव, डॉ धर्मेंद्र, डॉ आभा द्विवेदी, डॉ हृदयकांत, डॉ मुन्नू खान, डॉ हाफिज, डॉ मयंक कुशवाहा, डॉ अविनाश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।