सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित गाेष्ठी में उपस्थित कुलपति
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में बृहस्पतिवार को भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सुनिश्चयन की समस्या विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व कुलपति प्रो जेवी वैशम्पायन ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को सुनिश्चित करने की हमेशा से चुनौती रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का प्रभावी अवसर उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि आज मूल्यपरक शिक्षा का महत्व बढ़ा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने इसे बहुत व्यापक रूप से स्वीकार करने का आधार भी समाज के सामने प्रस्तुत किया है। वैज्ञानिक सोच और व्यापक दृष्टि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार है ।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षण कौशल और मूल्यांकन तीनों का उच्च कोटि का होना अपरिहार्य है। उच्च गुणवत्ता शिक्षण के लिए पाठ्यक्रम सर्वोत्कृष्ट होना परम आवश्यक है। इसीलिए कहा जाता है कि पाठ्यक्रम विषय का दर्पण है। पाठ्यक्रम ऐसा हो जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों परिष्कृत हों, इसका विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षक में ज्ञान का अकूत भंडार होना परम आवश्यक है। शिक्षक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए नियमित रूप से अध्ययन करना आवश्यक है। पाठ्यक्रम को विविध शिक्षण कौशल के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सरल और ग्राह्य बनाया जाना आवश्यक है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक, अच्छे विद्यार्थियों की फौज खड़ी कर सकता है और संस्थाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाने में अपनी भूमिका को साबित कर सकता है। अगर शिक्षक मन से और प्रवृत्ति से शिक्षक है तो विपरीत परिस्थितियों में भी गुणात्मक शिक्षा के साथ अपने विद्यार्थियों और अपनी संस्था को दुनिया की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बना सकता है। इसलिए शिक्षक को पूर्ण मनोयोग के साथ कक्षा में पूरे समर्पण भाव के साथ विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करना चाहिए। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय तकनीकी ज्ञान और शोध कार्यों को आगे बढ़ रहा है। इस दौरान प्रो सौरव, अविनाश प्रताप सिंह समेत आदि मौजूद रहे।