सिदार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु अपने स्थापना के सात साल बाद भी मानकों से काफी दूर है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन की दिशा में कदम नहीं बढ़ा पा रहा है। यूजीसी के मानक पर खरा नहीं उतरने के कारण शिक्षा के लिए ढांचागत विकास और शोध के लिए अनुदान प्राप्त नहीं हो रहा है। भूगोल विभाग की कक्षाएं शुरू नहीं होने से सभी 21 विभाग संचालित नहीं हो सके हैं।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों के सृजित 88 पद में 55 शिक्षक ही नियुक्त हुए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2015 में स्थापित विश्वविद्यालय में एक विभाग में सात की बजाए चार शिक्षक के ही पद सृजित किए गए, जो यूजीसी के मानक से कम है। विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 1300 पहुंच गई है। अब शिक्षकों के पद सृजन में संशोधन का प्रयास किया जा रहा है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में जुलाई से नया सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन भूगोल की कक्षाएं तय नहीं हैं। हालांकि, शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं। इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में भी ओएसडी प्रो. सुशील तिवारी के अलावा कोई भी विभागीय शिक्षक नियुक्त नहीं है, जबकि इसमें हिंदू, जैन एवं बौध धर्म दर्शन की परास्नातक कक्षाएं शुरू होने पर विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राओं का रुझान बढ़ने की संभावना थी। वर्तमान सत्र में विज्ञान संकाय सहित आठ विषयों की कक्षाएं शुरू हुई है, लेकिन विज्ञान भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है और बिना प्रयोगशाला के ही परास्नातक स्तर की पढ़ाई हो रही है।
जमीन भी है कम
मानक के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में कम से कम 50 एकड़ क्षेत्र में होना चाहिए, जबकि विश्वविद्यालय परिसर 46 एकड़ में ही है। नैक ग्रेडिंग के लिए परिसर का आकार पूरा होना चाहिए, शिक्षकों की संख्या पूरी होनी चाहिए, सभी विभागों में परास्नातक स्तर पर दो बैच उत्तीर्ण होने चाहिए, पुरातन छात्र परिषद के गठन के साथ उनकी उपलब्धियां भी होनी चाहिए।
वर्जन
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति की ओर है। भूगोल विषय के शिक्षकों की नियुक्ति जून तक होने की संभावना है। अन्य मानकों को भी पूरा करने का प्रयास जारी है।
-अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव