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Siddharthnagar News: बेटियों की कम लंबाई, फिर भी वॉलीबॉल में हासिल की ऊंचाई

Thu, 18 May 2023 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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जिला स्पोर्टस स्टेडियम में वालीबॉल खेलते खिलाड़ी। संवाद
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सिद्धार्थनगर। वॉलीबॉल के लिहाज से जिन बेटियों की लंबाई कम थी, उनकी मेहनत रंग लाई और सभी बाधाओं को लांघते हुए उन्होंने खेल में ऊंचाई हासिल की है। बात हो रही है शहरी सीमा में शामिल हुए रेहरा की बेटियों की। पांच साल में रेहरा की छह बेटियों ने राष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
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कंपोजिट विद्यालय रेहरा के खेल अनुदेशक अरविंद गुप्ता ने निरंतर प्रयास से इन बेटियों के हुनर को निखार कर टीम तैयार की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने गांव में बालिकाओं की वॉलीबॉल टीम बनाई। गांव के लोगों को बहुत समझाया तो उन्होंने बेटियों को खेलने की अनुमति दी थी। उनकी हाइट के साथ डाइट यानि खुराक की भी कमी थी, लेकिन नियमित प्रैक्टिस के बाद उन्होंने प्रदेश स्तरीय अनेक उपलब्धियां हासिल की है। संजना साहनी, ज्योति वर्मा, नेहा गौड़ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेल चुकी हैं, रेनू, अंजनी और संजना राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं।
निखरा हुनर तो साफ हुआ जीत का रास्ता
कोच अरविंद गुप्ता बताते हैं कि लंबी खिलाड़ियों को मात देने के लिए उन्होंने खेल का हुनर बदला। अटैकिंग के बजाय डिफेसिंव खेल पर फोकस किया और कम लंबाई होने के बावजूद भी टीम जीत हासिल करने लगी। बेसिक शिक्षा विभाग की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में टीम ने लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता है। बस्ती मंडल की टीम बनती है तो लगभग सभी खिलाड़ी इसी क्षेत्र की होती हैं। हालांकि, अब गांधी आदर्श विद्यालय बढ़नी में भी बेटियों ने वॉलीबॉल की ओर कदम बढ़ाया है। वहां एनआईएस कोच रत्नेश सिंह एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी शंभू गुप्ता प्रशिक्षण दे रहे हैं। बढ़नी कस्बे की ही रिया श्रीवास्तव अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुकी हैं। जब रिया ने खेल की शुरुआत की तो उनके साथ खेलने वाली कोई बालिका नहीं थी और उसने बालकों की टीम में वॉलीबॉल का ककहरा सीखा था।
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नहीं मिल पाया था स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश
स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश के लिए बालिका वर्ग की खिलाड़ी की लंबाई 160 सेमी होनी चाहिए। वहीं, स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रवेश के लिए 165 सेमी लंबाई होनी अनिवार्य है। वहीं, रेहरा की बेटियों की लंबाई 150 सेमी से कम ही है। इसी कारण उन्हें स्पोर्ट्स कॉलेज एवं स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिल पाया था।
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