सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर के बाबुलगंज मुहल्ले में हजरत अली असगर के रौजे पर बुधवार की रात मर्सिया-मजलिस का आयोजन किया गया। शोगवारों ने देर रात तक नौहा-मातम करके अली असगर की शहादत को याद किया।
जाकिर अजीम ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने दीन-ए-हक की हिफाजत के लिए जो कुर्बानी दी है उसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिल सकती है। इमाम हुसैन ने हक, सच्चाई, इंसाफ और इस्लाम को बचाने के लिए अपने छह माह के बेटे अली असगर की भी कुर्बानी दे दी। अली असगर की शहादत को सुनकर आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। सावन हल्लौरी और फरहान कदर ने कई दर्द भरे नौहे पढ़े, जिस पर शोगवारों ने मातम किया। इस दौरान तनवीर हसन, कायनात हैदर, जहीर शान, मोहम्मद, हैदर, सरवर मेहंदी, अमानत, समर, दानिश, संजू, सैयद मेहंदी, नायाब हैदर आदि मौजूद रहे।