सिद्धार्थनगर। भारत और नेपाल बार्डर के बीच सरहद के सीमांकन के लिए लगे सात छोटे पिलर के गायब होने का मामले की जांच चल रही है। जांच टीम की पड़ताल में गायब होने वाले सात पिलर बलरामपुर जनपद के सीमा के बीच बताए जा रहे हैं। चार वर्ष पहले ही आई भीषण बाढ़ के दौरान नदी और अन्य जलमग्न स्थल पर पिलर लगे होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे। ऐसा 28 नंबर गढ़ के तत्कालीन एसएसपी के जांच में सामने आया था। अब उनकी रिपोर्ट के आधार पर पिलर को ढूंढकर स्थापित किए जाने के लिए कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
सशस्त्र पुलिस बल नेपाल नंबर 5 बिंध्यबासिनी वाहिनी मुख्यालय रूपनदेही परियोजना और सशस्त्र पुलिस बल नेपाल नंबर 28 मुख्यालय कपिलवस्तु परियोजना ने सीमा स्तंभों का रखरखाव शुरू किया है। नेपाल का कपिलवस्तु जनपद 93 किलोमीटर का सीमा क्षेत्र भारत से जुड़ा है। जो लुंबिनी क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। वहीं, सीमा स्तंभ भी कपिलवस्तु में सर्वाधिक हैं। इनके संरक्षण का कार्य शुरू हो गया है। नेपाल के वाहिनी प्रमुख खत्री के मुताबिक लुंबिनी प्रांत में सीमा स्तंभों के रखरखाव का काम शुरू हो गया है और सभी को इसका समर्थन करना चाहिए। वहीं सहायक प्रमुख जिलाधिकारी पौडेल ने बताया था कि जांच में कपिलवस्तु में सात पिलर स्तंभ गायब हैं। यह पिलर बलरामपुर और सिद्धार्थनगर से लगने वाली सीमा के हैं। पिलर के गायब होने की जांच के बीच यह सामने आया है कि गायब हुए सभी पिलर बलरामपुर जनपद के सीमा पर स्थित थे। इस संबंध मेें नेपाल सहायक प्रमुख जिलाधिकारी कपिलवस्तु अनिल पौडेल ने बताया कि पिलर के गायब होने की जानकारी है। उसकी जांच की जा रही है। दोनों देश के समन्वय से पिलर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस दौरान भारत की तरफ से सहायक कमांडेंट जसवंत सिंह, बीओपी प्रभारी अशोक कुमार मीणा, इंस्पेक्टर अविनाश कुमार, पुलिस एसआई संजय सिंह, जीएस भाटी, रंजीत सिंह, नेपाल से सशस्त्र बल के डीएसपी धीरेंद्र शाह, अमीन पवन कुमार खत्री, प्रधान अशफाक अहमद, एएसआई भैरव कडेल, बीर बहादुर बूड़ा, चाकर चौड़ा थाना प्रभारी प्रेम बहादुर खडायत आदि मौजूद रहे।