सिद्धार्थनगर। नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है। उसके बाद गर्मी की छुट्टी भी हो चुकी है और नौ दिन बाद पुन: विद्यालय खुलने वाले हैं। लेकिन अबतक परिषदीय स्कूल के बच्चों को यूनिफार्म की धनराशि नहीं मिल सकी है। बेसिक शिक्षा परिषद ने अबतक अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म और जूता मोजा आदि के लिए 1200 रुपये नहीं भेजे हैं। ऐसे में अभिभावकों ने बच्चों की यूनिफार्म नहीं खरीदी है। जांच में सामने आ रहा है कि अधिकांश अभिभावकों के बैंक खाता और आधार नंबर बेमेल होने के कारण धनराशि नहीं जा पा रही है। 20 प्रतिशत मामले ऐसे ही हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था भी की गई है। पिछले दो साल से विद्यार्थियों के जूता, मोजा, बैग और स्वेटर खरीद के लिए 1200 रुपये सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। आकड़ों के मुताबिक जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्तर के करीब 2700 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें करीब सवा तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें आधार पंजीकरण, आधार सत्यापन, बैंक सीडिंग जैसी प्रक्रिया के कारण कई अभिभावकों के खाते में धनराशि नहीं पहुंची है। शिक्षकों को जांच करके धनराशि भेजवाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें वे लगे हैं। लेकिन बैंक खाता और आधार नंबर बेमेल होने केे कारण अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि नहीं पहुंच पा रही है। जबकि नए सत्र में बेसिक शिक्षा परिषद ने दो महीने में अभिभावकों के बैंक खाते में डीबीटी के तहत 1200 रुपये भेजने के निर्देश दिया है। लेकिन अब तक धनराशि नहीं आई है। ऐसे अभिभावक परेशान हैं। उनका कहना है कि इस योजना के चलाने से लाभ के बजाय नुकसान ही हो रहा है। विद्यालय पर एक साथ ड्रेस, जूता मोजा, स्वेटर आदि मिल जाता था। अब न धनराशि आ रही है और न ही विद्यालय वितरण होगा। इससे समस्या हो गई है। इस संबंध में बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजवाया जा रहा है, जो खाते में गड़बड़ी सामने आ रही है उसे सही करवाया जा रहा है।
बोले अभिभावक
अब तक बैंक खाते में धनराशि नहीं आई है। तो कहां से बच्चों के लिए ड्रेस आदि सामान खरीदें। बार- बार कहा जा रहा है कि जल्द धनराशि खाते में चली जाएगी। इससे अच्छा तो पहले था। विद्यालय पर ही सबकुछ मिल जाता था।
दिनेश पासवान, निवासी बिस्कोहर
मेरा एक बेटा कक्षा दो में और एक बेटी कक्षा चार में प्राथमिक विद्यालय में पढ़ती है। विद्यालय इंचार्ज ने जो-जो कागजात मांगे थे। मैंने सब दे दिया था, लेकिन न पिछले सत्र का ड्रेस आदि का पैसा आया और न ही इस सत्र का।
मनोज कौशल, निवासी बिस्कोहर