प्राथमिक विद्यालय थरौली में पढ़ाई करते बच्चे। संवाद
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शीत अवकाश के बाद सोमवार को स्कूल खुलने पर बच्चों के पहुंचने से कई दिनों से बंद चल रहे विद्यालयों में चहल-पहल बढ़ गई। कुछ स्कूलों में बच्चों के आने की संख्या कम रही। दोपहर बाद ठंड और गलन बढ़ने से अभिभावक बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए सतर्क नजर आएं।
पिछले 15 दिन से पड़ रही कड़ाके की ठंड एवं गलन से शीत अवकाश समाप्त होने के बाद भी डीएम के निर्देश पर स्कूलों को 14 जनवरी तक बंद रखा गया था। 15 जनवरी रविवार होने के कारण सोमवार को जिले के सभी स्कूल खुल गए। नौनिहालों के पहुंचने से बंद पड़े स्कूलों में रौनक लौट आई, वहीं कुछ स्कूलों में बच्चों के आने की तादाद कम रही।
शहर के केंद्रीय विद्यालय में सुबह नौ बजे से बच्चे पहुंचने शुरू हो गए, जबकि कुछ निजी विद्यालयों का संचालन सुबह 9.30 बजे हुआ। सुबह निकली धूप के बाद दोपहर से अचानक बदले मौसम में आसमान में बादल छाने से ठंड और गलन बढ़ गई।
अभिभावक सुबह स्कूल छोड़ने और वापस लाने के दौरान बच्चों को ठंड से बचाने के लिए सतर्क नजर आ रहे थे। बाइक से बच्चों को लाने और ले जाने के दौरान अभिभावक बच्चों के शरीर, सिर, कान आदि ढंकते रहे। ग्रामीण क्षेत्र में भी स्कूल खुलने पर बच्चों के स्कूल पहुंचने से रौनक बढ़ी दिखी।
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि ठंड के कारण कई दिनों से विद्यालय बंद थे, अब खुले है तो बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्कता बरतते हुए शैक्षणिक कार्य प्रारंभ किए गए हैं।