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Siddharthnagar News: सच के वास्ते कुर्बान हो गए, कैसे कोई भुलाए शहादत हुसैन की...

Sat, 22 Jul 2023 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। मोहर्रम यादगार है उन 72 भूखे प्यासे शौर्य वीरों की जिन्होंने सच के लिए लड़कर मर जाना स्वीकार कर लिया, लेकिन अत्याचार, अनैतिकता और अधर्म का समर्थन नहीं किया। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत मोहर्रम माह से ही होती है, और इसी महीने में कर्बला का मशहूर वाकया पेश आया। ये बातें मौलाना निजामुद्दीन नूरी में पहली मोहर्रम में बांसी में आयोजित मजलिस में कहीं।
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मौलाना ने कहा कि कर्बला की इस घटना में इस्लाम धर्म के आखिरी नबी हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन के साथ 75 वर्षीय इब्ने मज़ाहिर ने जहां अपनी शहादत को पेश किया तो वहीं छह माह के मासूम अली असगर अल्लाह की राह में कुर्बान हो गए। यह घटना 1400 वर्ष पूर्व इराक देश के कर्बला में घटित हुई थी। इस दर्दनाक घटना में पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे अपने लश्कर के साथ शहीद हो गए थे।
हजरत हुसैन का काफिला जब इराक की प्रसिद्ध नदी फरात के किनारे निर्जन रेगिस्तान कर्बला पहुचा तो कूफा प्रांत के गवर्नर इब्ने ज्याद के आदेश पर उनके फौजियों ने हजरत इमाम हुसैन के काफिले को रोककर ठहरने पर मजबूर कर दिया। उस दीन मोहर्रम की तीसरी तारीख थी। इसके बाद सातवीं तारीख को जालिम फौजियों ने फरात नदी का पानी भी रोक दिया। इसके बाद फौजी अपने शासक यज़ीद का बैयत यानी समर्थन करने का इमाम हुसैन पर दबाव बनाने लगे। जब इमाम हुसैन ने फौजियों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया तब यज़ीद के चार हजार फौजियों ने जंग का ऐलान कर दिया। इमाम हुसैन ने अनैतिकता व अधर्म का समर्थन नहीं किया और जंग में अपने 72 साथियों के साथ मोहर्रम की दसवीं तारीख को कर्बला के मैदान में शहीद हो गए। उसके बाद से हर वर्ष हजरत इमाम हुसैन व उनके काफिले में शामिल सभी शहीदों की याद में मोहर्रम मनाया जाता है।
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यहीं से मोहर्रम की शुरुआत
ताजिया मोहर्रम का प्रतीक बन चुका है और इसकी शुरुआत भारत से ही हुई है। ऐतिहासिक घटनाओं के अनुसार तैमूर लंग हर वर्ष मोहर्रम में हजरत इमाम हुसैन की मजार पर हाजिरी देने जाता था। जब उसने भारत पर आक्रमण किया, तब युद्ध के दौरान मोहर्रम पड़ गया। ऐसे में जंग छोड़कर इमाम हुसैन के मजार पर उसका पहुंचना असंभव था। यह सोचकर वह काफी चिंतित था। इसके बाद उसने अपने दरबारियों की सलाह पर इमाम हुसैन के मजार की आकृति बनवाई जो आज ताजिया के रूप में प्रचलित है।



बांसी में तेज हुई तैयारी
मोहर्रम को मनाए जाने की तैयारी बांसी नगर में शुरू हो गई है। नगर में स्थित सभी इमाम चौक की साफ-सफाई व मरम्मत का काम शुरू हो गया है। नगर के शास्त्रीनगर, अकबरनार, श्यामनगर, टेकधर नगर, आर्यनगर, राजेंद्रनगर, पंतनगर, गौतमबुद्ध नगर, पटेल नगर आदि मोहल्लों में स्थित इमाम चौक की साफ सफाई व मरम्मत का काम शुरू हो गया। साथ ही साथ चौक के आसपास के क्षेत्र की भी साफ-सफाई की जा रही है।
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