फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: जिम्मेदार बेखबर...खुद रहें सतर्क, यहां भी हो सकता है हादसा

Wed, 21 Aug 2024 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं में डग्गामार बस की टक्कर से पिकअप सवार 11 लोगों की चली गई जान
विज्ञापन

जिले में भी लांग रूट के लिए चलती है बड़े पैमाने पर डग्गामार बस
कार्रवाई से बचने और अधिक फेरा लगाने लिए रफ्तार में चलाते हैं वाहन बड़े हादसों के बाद कागजी कार्रवाई तक सिमटकर रह जाती है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डग्गामार बसों से हादसों का सिलसिला जारी है। बदायूं जिले में बस की टक्कर से पिकअप सवार 11 लोगों की जान चली गई। जांच में पाया गया बस डग्गामार है। तेज रफ्तार की वजह से यह हादसा हुआ है। जिले में भी इटवा, डुमरियागंज और बांसी से लांग रूट दिल्ली, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों के लिए डग्गामार बसें दौड़ रहीं हैं। मुनाफे की होड़ में क्षमता से अधिक सवारी और फेरा लगाने के लिए ओवर स्पीड से बसों को भगाया जाता है।
जिम्मेदार इन डग्गामारों पर कार्रवाई को लेकर खामोश हैं। ऐसे में हादसों से बचने के लिए खुद को सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि प्रदेश में किसी भी हिस्से में हादसे के बाद फरमान आता है, लेकिन वह कार्रवाई कागजों तक सिमट कर रह जाती है।
विज्ञापन

-
टूरिस्ट परमिट से स्लीपर बसों में ढोई जा रहीं सवारियां
जनपद के अलग-अलग इलाकों से रिजर्व परमिट की आड़ में सवारियां ढोई जा रही हैं। बढ़नी, गोल्हौरा, बांसी, डुमरियागंज से प्रतिदिन दस से बारह बसें दिल्ली, पंजाब और मुंबई के लिए जाती हैं। बड़ी संख्या में जनपद के लोग दूसरे प्रदेशों और जनपदों में रोजगार के सिलसिले में रहते हैं। दिल्ली, लुधियाना और पंजाब, अंबाला, मुंबई में मजदूरी करने के साथ ही वहां की फैक्टरियों में काम करने के लिए भी मजदूर जाते हैं। बांसी, इटवा और डुमरियागंज के बैदौला चौराहे पर बाकायदा काउंटर लगाकर स्लीपर बसों की सीटों को बुक किया जाता है। लोगों का लगेज भी बुक कर उनके बताएं पते पर पहुंचाया जाता है। इन मार्ग से ही ऐसी कई बसों का संचालन होता है। इन बसों के संचालकों के पास रिजर्व परमिट या पार्टी परमिट ही होता है। उक्त दोनों ही परमिट पर सवारियों को ढोने की अनुमति नहीं है।
-

नियमित रूट के अलावा बुकिंग पर भी चलती है स्लीपर बसें
स्लीपर बसें नियमित रूट के अलावा बुकिंग पर भी चलती हैं। इसके लिए बस मालिक रिजर्व परमिट और पार्टी परमिट बनवाते हैं। दोनों परमिट तीन से सात दिन तक के लिए बनते हैं। तीन दिन के परमिट का शुल्क 550 रुपये और सात दिन की फीस 1,000 रुपये होती है। इसमें किसी टूर या वैवाहिक समारोह के लिए वाहन ले जाने की अनुमति होती है। इस परमिट पर फुटकर सवारियों को नहीं ले जाया जा सकता है।
विज्ञापन


-

स्लीपर बसों से सामान लाने में भी होती है जीएसटी की चोरी

स्लीपर बस संचालक सवारियों के साथ माल ढुलाई का काम भी कर रहे है। इस कारण टूरिस्ट बसें जीएसटी की चोरी कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बसों की छत व डिग्गी में भरकर जीएसटी की चोरी करके सामान ढोने का काम कर रही हैं। सामान ढोने से सवारी वाले बस में लोड बढ़ने से हादसे भी हो सकते हैं।
-

नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाता है। अवैध संचालन पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाती है। जुर्माना लगाने के साथ ही सीज किया जाता है।
-सुरेश कुमार, एआरटीओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें