विद्यालयों के अभिलेख और संसाधन बचाने की चुनौती
बारिश और बाढ़ से दौ से अधिक परिषदीय स्कूलों में भरा पानी
सिद्धार्थनगर। लगातार बारिश और बाढ़ के चलते जिले में शैक्षिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। दौ सौ से ज्यादा स्कूलों में पानी भर गया है। विद्यालयों के अभिलेख और संसाधन बचाने की चुनौती है। सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है। मौसम के रुख को देखते हुए स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है। बाढ़ का कहर थमने के बाद परिषदीय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
विद्यालयों में पानी भरने के साथ ही स्कूल जाने वाले मार्ग भी जलमग्न हो गए हैं। स्कूलों के अभिलेख सुरक्षित रखने में शिक्षकों को मशक्कत करनी पड़ रही है। शिक्षक किसी तरीके से पहुंच कर जरूरी रजिस्टर और सामान को सुरक्षित कर रहे हैं। कुछ जगहों पर तो नाव के सहारे अभिलेखों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है। बावजूद इसके, उसका बाजार, भनवापुर, जोगिया, शोहरतगढ़, बढ़नी और लोटन विकास क्षेत्र में स्कूल के संसाधनों की क्षति की आशंका बनी हुई।
दूर-दराज के गांवों में अधिकतर विद्यालयों का निर्माण निचले इलाकों में होने से वहां भारी जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। बाढ़ के चलते भवन को तो नुकसान पहुंच ही रहा है, बच्चों को बैठने के लिए मौजूद फर्नीचर भी पानी में डूब गए हैं। जिन स्कूलों में बाढ़ का पानी ज्यादा है, वहां के फर्नीचर को काफी नुकसान होगा और बाद मेें बच्चों को बैठने में परेशानी होगी।
भनवापुर विकास क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय सिंगारजोत, बिजौरा, कमसार, पलेसर, बीरपुर एहतमाली, पेड़ारी, लेवड़ी आदि और उसका बाजार विकास क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय हथिवड़ताल, अजगरा, फुलवरिया आदि समेत करीब 50 से अधिक ऐसे स्कूल हैं जहां चार से पांच फीट तक पानी घुस गया है। वहीं, शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में आई बाढ़ से बढ़नी ब्लाक के आधा दर्जन स्कूलों में पानी भर गया है।
प्राथमिक विद्यालय मटियार उर्फ भुतहवा, प्राथमिक विद्यालय टीकर, उच्च प्राथमिक विद्यालय भुतहवा, प्राथमिक विद्यालय इटहिया, कंपोजिट विद्यालय रामनगर उर्फ पकड़िहवा, जिगनिहवा उर्फ धनौरीढ़ेकहरी, हलौरा, संसारी, तौलिहवा आदि स्कूलों में पानी भर गया है। इन विद्यालय में मौजूद संसाधनों की, बाढ़ के चलते अधिक क्षति हो रही है।
फिलहाल, जिले में राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदियां खतरे के निशान को पार कर बह रही है, जबकि अन्य नदियां कूड़ा, घोघी, बानगंगा आदि का जलस्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। ऊपर से बारिश है, जो थमने का नाम नहीं ले रही है और नेपाल से पानी छोड़े जाने से बाढ़ की स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों के लिए विद्यालय पहुंचना चुनौती
सिद्धार्थनगर। बाढ़ को देखते हुए शिक्षण संस्थाओं को बंद करने के साथ बीएसए ने शिक्षकों को विद्यालय में रहकर विभागीय कार्य संपादित करने के आदेश दिए हैं। शिक्षक उन विद्यालयों तक तो पहुंच जा रहे हैं, जहां संपर्क मार्ग पर पानी कम हैं। तमाम स्कूल ऐसे हैं, जहां पहुंचना संभव ही नहीं है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने और विद्यालयों में पानी घुसने से नाव के सहारे ही वहां जाया जा सकता है। इन विद्यालयों में मौजूद अभिलेख और संसाधनों को कितना नुकसान हो रहा है, इसका आकलन बाढ़ कम होने के बाद ही लगाया जा सकेगा।
हर साल बाधित होती है पढ़ाई
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में विद्यालयों में पानी घुस गया है। बाढ़ पूरी तरह हटने के बाद ही पढ़ाई शुरू हो सकेगी, जबकि इन्हीं क्षेत्रों में नेटवर्क भी खराब रहता है। इस कारण इन विद्यालयों के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने में पीछे रह जाते हैं।
जिले में करीब दो सौ विद्यालय बाढ़ में डूब गए हैं। बाढ़ग्रस्त विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। जहां विद्यालय तक पहुंचना संभव है, वहां शिक्षक पहुंच रहे हैं। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि बाढ़ की विभीषिका में लोगों को सहयोग करें। -देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए