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Siddharthnagar News: बुद्ध के प्रसाद को प्रसिद्धि दिलाने में पद्मश्री तक पहुंचे आरसी चौधरी

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- काला नमक को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए लंबे समय तक किया अनुसंधान
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- एक जिला एक उत्पाद में चयनित है काला नमक धान



संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर/संतकबीरनगर। काला नमक चावल को विश्वपटल पर पहचान दिलाने वाले वैज्ञानिक डॉ आरसी चौधरी को पद्मश्री के एलान से बुद्धनगरी गौरवान्वित महसूस कर रही है। एक जिला-एक उत्पाद में चयनित काला नमक धान इलाके का ब्रांड बन कर उभरा है।



गौतम बुद्ध के धरती का प्रसाद कहे जाने वाली सिद्धार्थनगर की माटी काला नमक धान के लिए एक अलग पहचान बन चुकी है। सीमा से सटे तराई का इलाका इस खुशबू वाले धान के लिए एक विशेष क्षेत्र माना जाता है। इस उपलब्धि का श्रेय जाता है संतकबीरनगर के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ आरसी चौधरी को। डॉ चौधरी ने लगातार रिसर्च कर न सिर्फ काला नमक धान की गुणवत्ता में सुधार के उपाय बताए बल्कि इसे शुगर फ्री भी बनाया। उन्होंने इस धान की कई और प्रजातियां तैयार की हैं।
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डॉ.रामचेत चौधरी बताते हैं कि पद्मश्री के लिए चुना जाना गौरव की बात है। इस उपलब्धि में पूर्वांचल की माटी का बड़ा योगदान है। डॉ चौधरी ने बताया कि यहां काला नमक धान महात्मा बुद्ध के समय में बड़े पैमाने पर होता था। उन्होंने इस विशिष्ट प्रजाति को फिर से क्षेत्र में पुनर्जीवित किया और किसानों को इसकी खेती के प्रति जागरूक किया। अब बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा। प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद के तहत सिद्धार्थनगर के काला नमक को चयनित किया है।



डॉ चौधरी को पद्मश्री मिलने पर अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, सांसद प्रवीण निषाद, पूर्व जिलाध्यक्ष रामललित चौधरी, बनर्जी लाल अग्रहरि, सतीश सिंह, पंकज, अमित शर्मा, समेत अन्य ने बधाई दी है।

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संतकबीरनगर के रहने वाले हैं डॉ आरसी चौधरी



डॉक्टर डॉ आरसी चौधरी मूल रूप से संतकबीरनगर जनपद के महुली क्षेत्र के झींगुरापार गांव के रहने वाले हैं। 8 नवंबर 1944 को जन्मे डॉ चौधरी ने एमएससी की डिग्री कानपुर विश्वविद्यालय से ली। यहीं से डॉक्टरेट की उपाधि ली। डॉक्टर चौधरी ने तुलसी के वैज्ञानिक और बायो मेडिकल महत्व को दर्शाते हुए खेती पर भी बड़ा अभियान चलाया। फिलहाल वह गोरखपुर के पिपराइच क्षेत्र में काला नमक चावल की प्रजाति को विकसित करने पर शोध कर रहे हैं।



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बौद्ध देशों में है अधिक डिमांड



नेपाल, चीन, वर्मा, ताइवान, इंडोनेशिया और श्रीलंका में बौद्ध धर्म को मानने वाले काला नमक चावल को भगवान गौतम बुद्ध का प्रसाद मानते हैं। इसलिए इन देशों में इस चावल की मांग काफी ज्यादा है। फिलहाल मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगा रखी है।
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प्रोत्साहन के बाद बढ़ने लगा रकबा

एक समय ऐसा था कि काला नमक धान का रकबा काफी कम हो गया था। किसानों का कहना था कि लागत के हिसाब से उपज कम होती है। दाम भी नहीं मिलता है। प्रदेश सरकार ने जब एक जनपद एक उत्पाद में काला नमक धान का चयन किया तो तस्वीर बदल गई। लगातार इस धान को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। मौजूद समय में जनपद में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर काला नमक धान की खेती हो रही है।
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