ईओ नगर पालिका, डीपीओ गंगा समिति, जलनिगम, सिंचाई विभाग की टीम वाराणसी में करेगी सर्वे
वाराणसी में एसटीपी के निर्माण, संचालन व लाभ और हानि संबंधी जानकारी कर तैयार होगी रिपोर्ट
परमात्मा शुक्ल
सिद्धार्थनगर। जिले के प्रमुख प्राकृतिक जलस्रोतों में शामिल राप्ती नदी के पानी को वाराणसी में गंगा की तरह शुद्ध, स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने की कवायद शुरू हो गई है। ईओ बांसी व नगर पालिका सिद्धार्थनगर, खादी ग्रामोद्योग के प्रबंधक, डीपीओ गंगा समिति, जलनिगम व सिंचाई विभाग की टीम वाराणसी भ्रमण करेगी। जहां नमामि गंगे के तहत बने एसटीपी के निर्माण, संचालन के परिणाम व उससे होने वाले लाभ व हानि का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसके तर्ज पर पहले चरण में बांसी नगर पालिका में 15 करोड़ की लागत से एसटीपी का निर्माण होगा और पूरे नगर के गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर राप्ती नदी में छोड़ा जाएगा।
बांसी कस्बा में घर निकलने वाला गंदा पानी नाले के माध्यम से राप्ती नदी में गिरता है, जिसमें नगर पालिका की ओर से नाली में जाली लगाकर कूड़ा, कचरे को नदी में जाने से रोका जा रहा है। जलनिगम शहरी की तरफ से नगर पालिका बांसी के 60 हजार आबादी के अनुसार पांच एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे नगर क्षेत्र के सभी घर से निकलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर राप्ती नदी में डाला जाएगा।
बीते 16 जुलाई को डीएम डॉ. राजागणपति आर की अध्यक्षता में हुई जिला गंगा समिति की बैठक में बांसी कस्बा से राप्ती नदी में प्रवाहित होने वाले नाले का चिह्निकरण एवं उपचार के लिए एसटीपी निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए एडीएम एवं जिला गंगा समिति काे जनपद स्तरीय टीम गठित कर एसटीपी के कार्यप्रणाली का अध्ययन करने के लिए वाराणसी का दौरा कर सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दी गई है। जिसके क्रम में जल्द ही जनपद स्तरीय टीम वाराणसी का भ्रमण कर वहां गंगा नदी किनारे बने एसटीपी के निर्माण एवं संचालन की जानकारी साझा करेगी। डीपीओ जिला गंगा समिति पंकज त्रिपाठी का कहना है कि वाराणसी दौरे के बाद मिली जानकारी के आधार पर यहां एसटीपी निर्माण संबंधी प्रक्रिया में तेजी आएगी।
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जलनिगम की तरफ से भेजा गया है प्रस्ताव
जल निगम शहरी की ओर से जिले के सभी 11 नगर निकायों में आबादी के अनुसार क्षमता वाले एक-एक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। 75 करोड़ लागत के इस कार्ययोजना की स्वीकृति मिलने से नदियां, प्राकृतिक नाले व तालाब समेत अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में जहर नहीं घुलेगा।
इसमें सबसे बड़ा 7.5 एमएलडी का एसटीपी निर्माण नगर पालिका सिद्धार्थनगर में और सबसे कम क्षमता 1.5 एमएलडी की एसटीपी बढ़नी नगर पंचायत में स्थापित होनी है। वहीं नगर पालिका बांसी में आबादी के अनुसार पांच एमएलडी क्षमता का एसटीपी का निर्माण होना है। इसके साथ ही नगर पंचायत कपिलवस्तु, उसका बाजार, बढ़नीचाफा, इटवा, डुमरियागंज, भारतभारी, बिस्कोहर व शोहरतगढ़ में भी आबादी के अनुसार क्षमता वाले एसटीपी स्थापित किए जाएंगे।
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जिले में प्रदूषित हो रहे प्राकृतिक जलस्रोत
शहर की डेढ़ लाख आबादी के साथ सभी 11 निकायों की पांच लाख आबादी के घर से निकलने वाले गंदे पानी से आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत दूषित हो रहा है। शहर के निकट से गुजरने वाले प्राकृतिक जमुआर नाला का पानी गंदगी के कारण काला पड़ चुका है, जिस कारण स्थानीय लोग इसके पानी का प्रयोग करने से बच रहे है। यहां तक कि जिले के सबसे बड़ा प्राकृतिक जलस्रोत राप्ती नदी बांसी और डुमरियागंज कस्बा के घरों के गंदे पानी से दूषित हो रहा है। इसी तरह बूढ़ी राप्ती, बानगंगा व कूड़ा नदियां भी आसपास स्थित कस्बों व गांवों के घर से निकलने वाले गंदे पानी से दूषित हो रहा है।
शहर व कस्बों में स्थित कई तालाब के पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुके है, जिससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी का पशुओं को स्नान कराने व पीने के लिए भी उपयोग नहीं किया जा रहा है।
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एसटीपी के लिए निर्मित होगा नालों का जाल
शहर व कस्बों में निचले भूमि पर ही एसटीपी स्थापित होगा, जहां पूरे शहर के घर का गंदा पानी एकत्रित कर ट्रीटमेंट करने के लिए नालों का निर्माण किया जाएगा। जो आबादी क्षेत्र के सभी घर से निकलने वाली नालियों को जोड़ते हुए एक जगह पहुंचाएगा। यहां तक कि शहर अथवा कस्बा की सभी नालियों से निकलने वाले गंदे पानी को पंप स्टेशन से पंपिंग कर एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। जहां इसका ट्रीटमेंट कर शुद्ध पानी प्राकृतिक जलस्रोतों में छोड़ा जाएगा।
नगर पालिका बांसी में दो मोहल्ले के घर का गंदा पानी नाली के माध्यम से राप्ती नदी में गिरता है, शेष मोहल्ले का पानी ताल में गिराया जाता है। जिसे नाली निर्माण कर एक जगह एकत्रित कर ट्रीटमेंट किया जाएगा। जल निगम शहरी के एई ओपी चौधरी कहते है कि घर व सामुदायिक शौचालयों से भी गंदगी एकत्रित कर एसटीपी पर ट्रीटमेंट कर जैविक खाद बनाया जाएगा।