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बारिश से बदला मौसम, धान की फसल को तात्कालिक राहत

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तुलसीयापुर क्षेत्र में बारिश के बाद खेत में घास निकालते किसान दंपती। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बारिश से बदला मौसम, धान की फसल को तात्कालिक राहत
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सिद्धार्थनगर। जिले में कई स्थानों पर हुई बारिश से मुरझा रही धान की फसल को तात्कालिक रूप से संजीवनी मिल गई है। शनिवार रात शुरू हुई बारिश रविवार दोपहर 12 बजे तक जारी जारी। खेतों में नमी बढ़ गई और लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली। दिनभर बादल छाए रहे और रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही।
रविवार को अवकाश के दिन सुबह बारिश से लोगों की दिनचर्या बदल गई। बच्चों की छुट्टी थी और लोगों को भी काम पर नहीं जाना था। इस कारण लोगों ने बारिश का आनंद लिया। मौसम सुहाना हो जाने से बिजली की आंख मिचौली का भी असर नहीं महसूस हुआ। हालांकि, बारिश के दौरान फॉल्ट के कारण बिजली आती-जाती रही। बारिश से खेतों में मुरझा रही फसल को हरा होने का सहारा कमल गया, जबकि किसानों के अनुसार, जिस फसल को अब तक किसी तरह सूखने से बचा लिया गया था, उसे पनपने के लिए मौका मिल गया है। जिन फसलों की पत्तियां पीली पड़ गई हैं, उनके तैयार होने की संभावना कम है।
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शोहरतगढ़ में अच्छी बारिश, इटवा में कम
मानसून ऋतु के दौरान जिले में अब तक हुई संचयी वर्षा अति अल्प श्रेणी में आती है। पिछले 24 घंटों के दौरान रविवार 08:30 बजे तक शोहरतगढ़ में 57 मिमी. के साथ सिद्धार्थनगर जनपद में औसतन 28.1 मिमी. बारिश दर्ज की गई। बांसी में 33.8 मिमी, डुमरियागंज में 13 मिमी., ककरही 19.2 मिमी., उस्का बाजार 17.4 मिमी., इटवा 9 मिमी. बारिश दर्ज की गई। बारिश कहीं कम हुई तो कहीं ज्यादा। जिन क्षेत्रों में कम बारिश हुई, उन क्षेत्रों के किसान मायूस हैं।
राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसून द्रोणी के उत्तरी दिशा में स्थानांतरित होकर हिमालय की तराई में अवस्थित रहने के कारण 4-5 दिनों के दौरान तराई में बादल छाए रहने तथा रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है।
आधी रात से हो रही बारिश मगर नहीं मिटी खेतों की दरार
इटवा। शनिवार देर रात से हुई बूंदाबांदी के बावजूद धरती की प्यास नहीं बुझी है। सूखे के चलते खेत की दरारें अब भी यथावत बनी हुई हैं। यह बारिश दरारों को नहीं भर पाई है।
स्थानीय तहसील क्षेत्र में लगातार कई दिनों से हो रही कड़ी धूप से किसानों की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। कुछ किसान बारिश की उम्मीद में पंपसेट अथवा अन्य साधनों से से दो-तीन बार फसल की सिंचाई कर चुके थे, परंतु गरीब व असहाय किसान फसल को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी किसानों के लिए सौगात तो है, परंतु इतनी बारिश धान की फसल के लिए पर्याप्त नहीं है।
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क्षेत्र के रमवापुर पाठक, महुआ, कटेश्वरनाथ, करहिया, संग्रामपुर, सुहेलवा, बल्लीजोत, गालापुर, लटेरा, कलवारी आदि गांवों के किसानों को बारिश की अभी दरकार है।
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