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Siddharthnagar News: दस माह में तय नहीं हुई प्रोजेक्ट की जमीन, अभी शुद्ध पानी के लिए करना होगा इंतजार

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नगर पालिका परिषद ने जल निगम को नहीं दिया जमीन का प्रस्ताव
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अमृत-2 योजना में चयनित होने के बाद भी शहर के लोगों को शुद्ध पानी के लिए कई माह इंतजार करना होगा। इसकी वजह यह है कि नगर पालिका परिषद की ओर से प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए दस माह से जमीन का प्रस्ताव नहीं मिला है। जमीन तय होने में देरी के कारण प्रोजेक्ट शुरू करने में देर होती जा रही है। शहर की 85 हजार आबादी के लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
नगर पालिका परिषद के लिए पेयजल के प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्राप्त हो गई है। इस प्रोजेक्ट में 11 स्थानों पर मानक के अनुसार जमीन प्राप्त होगा तो सर्वे होगा। उसके बाद इस्टीमेट बनाया जाएगा और उसकी स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। शासन से इस्टीमेट स्वीकृत होने के बाद धन अवमुक्त होगा, उसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी, फिर काम शुरू होगा, जबकि पहले चरण में ही देर हो रही है।
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प्रोजेक्ट के अनुसार आठ स्थानों पर पानी टंकी बनाई जानी है, इन स्थानों पर दो ट्यूबवेल बनाए जाएंगे। दूसरा ट्यूबवेल पानी टंकी से 300 मीटर दूर होना चाहिए। पानी टंकी के लिए 900 वर्ग मीटर और उसके पास ट्यूबवेल के लिए 225 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है, इसके साथ ही रेहरा, पकड़ी और पिपरा पांडेय में ट्यूबवेल के बोर होंगे,क्योंकि इन स्थानों पर पानी टंकी के पास एक ही ट्यूबवेल है। इसके साथ ही करीब 200 किमी पाइप लाइन बिछाई जाएगी, इसमें शहर की 30 साल से अधिक पुरानी पाइप लाइन भी बदली जाएगी। जल निगम के इंजीनियरों के अनुसार नवंबर 2022 में ही उन्होंने नगर पालिका परिषद से जमीन का प्रस्ताव मांगा था, लेकिन लिखित प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण सर्वे का शुरू नहीं हो पाया है। अनुमान के अनुसार शहर में करीब 70 करोड़ रुपये से पेयजल का कार्य होगा तो पूरे शहर को शुद्ध पानी मिलने का रास्ता साफ होगा।
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तीन प्रोजेक्ट स्वीकृत, दो की फाइल पहुंची शासन में
नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के साथ नगर पंचायत भारतभारी व बढ़नीचाफा में भी पेयजल के प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे। दोनों नगर पंचायतों में जमीन का प्रस्ताव मिला, सर्वे हुआ, इस्टीमेंट बना और इसकी स्वीकृति के लिए फाइल शासन को भेज दी गई है। जलनिगम के अनुसार बढ़नचाफा में 41 करोड़ और भारतभारी में 29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
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शहर में है करीब 50 साल पुरानी पाइप लाइन
नगर पालिका परिषद के विस्तार होने से पहले शहर में जो पाइप लाइन पड़ी है, वह 50 साल से अधिक पुरानी है। यही कारण है कि त्योहार पर पानी की मांग बढ़ने पर आपूर्ति बढ़ाई जाती है तो कहीं कहीं पाइप फट जाती है। जब रिसाव होता है तो घरों में गंदा पानी जाने लगता है। तीन माह पहले ही पानी आपूर्ति बढ़ाने के कारण कांशीराम आवास के पास पाइप लाइन फट गई थी। शहर में पुरानी नौगढ़, नगर पालिका एवं थाने के पीछे वाले इलाके में ज्यादा पुरानी पाइप पड़ी है। यहीं कारण है कि शहर में जहां भी 4 केवी पर सेंटीमीटर स्क्वायर पाइप लगी है, उसे बदलकर 6 केवी किया जाएगा। कोतवाली के पीछे रहने वाले नजीर मलिक बताते हैं कि शहर की पाइप लाइन करीब 50 साल पुरानी है।
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नगर पालिका परिषद के चेयरमैन एवं ईओ की ओर से जमीन का लिखित प्रस्ताव मिलेगा तो सर्वे कार्य शुरू होगा। मैंने नगर निगम को नवंबर में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन प्रस्ताव अब तक नहीं मिला है। प्रस्ताव मिलते ही सर्वे सहित अन्य कार्य तेजी से किया जाएगा।
ओपी चौधरी, सहायक अभियंता, जलनिगम शहरी

अमृत-2 योजना के लिए जमीन देने के लिए दो बार जल निगम के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। 15 दिन पहले मैंने बैठक की और सभी जमीनों के बारे में बता दिया। एक जमीन पर विवाद था, उसे सुलझा लिया गया है। जो भी समस्या आएगी, उसका समाधान करके जल्द ही सेर्व पूरा कराया जाएगा।
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गोविंद माधव, चेयरमैन नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
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नगर पालिका परिषद के ईओ के निर्देश देंगे कि अमृत -2 प्रोजेक्ट में जल निगम को जल्द ही जमीनों को प्रस्ताव भेज दें। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करके कार्य शुरू कराया जाएगा।
संजीव रंजन, जिलाधिकारी
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