विघटनकारी प्रवृत्तियों ने विभाजन की परिस्थितियां पैदा की
- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तुष्टीकरण की राजनीति ने भारत की एकता अखंडता को हमेशा नुकसान पहुंचाया है। भारत की स्वतंत्रता के समय भी इस प्रकार परिस्थितियों ने विभाजन का अवसर दिया। विघटनकारी प्रवृत्तियों और विचारधारा ने विभाजन की परिस्थितियां पैदा की। स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय राजनीति की कुछ कमियां थीं, जिसके कारण विभाजन की परिस्थिति बनी।
ये बातें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के इतिहास विभाग के आचार्य प्रो. सलिल मिश्रा ने कही। वह सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि विभाजन के समय बंटवारे के समर्थकों ने कहा था कि यह समस्या का समाधान है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह समस्या लगातार बढ़ती गई और आज भी भारत विभाजन के दंश से उबर नहीं पाया है।
कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि हम अपने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच सामाजिक समरसता राष्ट्रीय एकता और अखंडता के मूल्यों और उसकी अपरिहार्यता के मान बिंदुओं पर चर्चा कर रहे हैं ताकि भविष्य के भारत में सबके योगदान को सन्नहित करने का प्रयास सार्थक हो।
अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. हरीश कुमार शर्मा, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी, डॉ. अमित साहनी, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, प्रो. दीपक बाबू, प्रो. प्रकृति राय, डॉ. नीता यादव मौजूद रहे।