दीपावली और छठ पूजा में बड़ी संख्या में प्रवासी आ रहे हैं घर
ट्रेनों में नहीं मिल रही सीट, बसों की कमी से भी हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। दीपावली पर्व में बाहर से घर लौटने के लिए यात्रा की मशक्कत भारी पड़ रही है। शुक्रवार रात 10 बजे मुंबई से आए पनवेल ट्रेन से सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर उतरे उसका क्षेत्र के बनवारी लाल कहते हैं कि तीन दिन तक दौड़ने के बाद उन्हें तत्काल कंफर्म टिकट मिल पाया। जबकि उनके कई साथी ट्रेन टिकट नहीं मिलने और साधन की व्यवस्था नहीं होने के कारण दीपावली में घर नहीं आ सके।वहीं, लखनऊ से भी ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ के चलते सीट मिलना जंग जीतने जैसा लग रहा है।
ट्रेन और बसों में भीड़ के चलते दिल्ली, मुंबई, पंजाब के साथ ही लखनऊ से भी परिवार के बीच दीपावली मनाने के लिए घर आना मुश्किल हो जा रहा है। मुंबई से जनरल कोच में यात्रा कर घर पहुंचे बर्डपुर क्षेत्र के जैसराम कहते हैं ट्रेनों में टिकट की मारामारी के बाद सीट के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ रही है। हालत यह है कि जनरल कोच में खड़े होने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही थी। लंबी यात्रा में किसी तरह बैठने की जगह तो मिली लेकिन पिछले 36 घंटे से आराम नहीं कर सके।
वहीं, शनिवार सुबह लखनऊ जाने वाली ट्रेन में बैठने के लिए भी यात्रियों को जूझना पड़ रहा था। ट्रेन पकड़ने के लिए सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ आपस में धक्का-मुक्की करती दिखी। लोग बाहर से ही सीट आरक्षित करने के लिए ट्रेन में बैठे यात्रियों से कहासुनी करते नजर आ रहे थे।
बाहर जाने के लिए करना होगा बस का इंतजार
सिद्धार्थनगर बस अड्डे पर लखनऊ, कानपुर समेत दूर की यात्रा के लिए बस के लिए देर तक इंतजार करना होगा। शनिवार को दोपहर में कानपुर जाने के लिए रोडवेज बस के लिए इंतजार कर रहे राहुल कहते हैं कि वह दो घंटे से बस पकड़ने के लिए यहां आए हैं। उन्हें कानपुर में बीमार बड़ी बहन के पास जाना था, जहां के लिए वह लोटन से आए हैं। लेकिन अब तक वहां के लिए कोई बस नहीं मिल पाई है। अब वहां पहुंचने में देर हो जाएगी, जिससे दीपावली में रविवार को घर लौटना मुश्किल होगा।
ट्रेनों में जगह नहीं होने के कारण यात्रियों को सीट मिलने में मुश्किल हो रही है। लखनऊ से जिले के लिए सीधी बस सेवा भी बहुत कम होने के कारण सांसत हो रही है।
-फैसल अहमद, यात्री
लखनऊ से भी यहां आने के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ रही है। टिकट कंफर्म होने के बाद किसी तरह सीट मिली तो लगा जैसे जंग जीत गए हैं।
- मिसबहुद्दीन खान, यात्री