फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: ऑनलाइन सुविधा का दावा बेदम, लाइन लगाने में निकलता है दम

Fri, 19 Apr 2024 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
मेडिकल कालेज के ओपीडी में डॉक्टर के कमरें बाहर मरीजों की भीड़। संवाद
विज्ञापन
फोटो- है
विज्ञापन

- 95 प्रतिशत मरीज ऑनलाइन व्यवस्था से अनजान, लाइन में लगकर होते हैं परेशान

- ऑनलाइन नंबर के लिए आभा एप लांच, इसका भी नहीं मिल रहा लाभ

- ऑनलाइन नंबर के लिए मेडिकल कॉलेज का पोर्टल भी शुरू पर जानकारी

- ओपीडी में चिकित्सकों के केबिन में लगे दवा लिखने के लिए कंप्यूटर, नहीं हो रहा उपयोग

- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की पड़ताल में ऑनलाइन व्यवस्था हकीकत आई सामने

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्र्थनगर। जानकारी का अभाव तो कहीं सिस्टम की सुस्ती की वजह से डिजिटल व्यवस्था के लाभ से मरीज वंचित हैं। कहने के लिए ऑनलाइन पर्ची और अप्वाइंटमेंट की सुविधा है, लेकिन 95 प्रतिशत मरीज ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए काउंटर पर धक्का खा रहे हैं। पर्ची कटवाने के लिए घंटों लाइन में लगाकर इनका दम और धैर्य दोनों जवाब दे जाता है। कोई चिकित्सक को दिखा पाता है तो कोई जांच से वंचित रहा जाता है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को ऑनलाइन सुविधा के दावे की हकीकत जानने के लिए ओपीडी की पड़ताल की गई तो सच्चाई सामने आई। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि सुविधा उपलब्ध है, मरीजों का इसका लाभ लेना चाहिए है।

मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर लाभ मिले इसके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जा रही है। ओपीडी पर्ची के लिए मरीज काउंटर पर घंटों लाइन लगाकर खड़े होते थे। इससे उन्हें निजात मिले। इसके लिए पर्ची और ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट की सुविधा कर दी गई है। जिला अस्पताल से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में संबद्ध होने के बाद लखनऊ के राम मनोहर लोहिया,केजीएमयू, एसजीपीजीआई की तर्ज पर ऑनलाइन सुविधा शुरू की गई है। लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हाईटेक सुविधा के दावे की हकीकत जाने के लिए मेडिकल कॉलेेज। यहां जो तस्वीर सामने आई वह हाईटेक व्यवस्था के दावे को आईना दिखाने वाली थी। ऑनलाइन पर्ची वाले काउंटर मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी। लोग जल्द पर्ची मिले और चिकित्सक के पास पहुंचकर दिखाएं इसके जद्दोजहद में लगे थे। लाइन में खड़े जोगिया निवासी रमेश से पूछा गया कि ऑनलाइन नंबर लग जाता है फिर क्यों लाइन में लगे हो। उससे तो काम जल्द हो जाता। उसने कहा कि पता ही नहीं है कि ऑनलाइन कैसे लगता है। जानकारी देनी चाहिए तभी तो मरीज को पता चलेगा। हमारे पास स्मार्ट फोन भी है कर लेते। सब कहने के लिए है, कभी व्यवस्था नहीं बदलेगी। दूसरे कतार में खड़े रामहित ने कहा कि इनकी ऑनलाइन व्यवस्था भी ध्वस्त है। आभा एप पर ऑनलाइन पर्ची मिलने की बात करते हैं। लेकिन क्यूआर कोड स्कैन करने और पर्ची लेने में आधा घंटा से अधिक का वक्त लग जाता है। तबतक लाइन लगाकर पर्ची मिल जाएगी। इसी प्रकार अन्य मरीजों की ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर दलील थी। लगभग 95 प्रतिशत मरीज ऑनलाइन व्यवस्था से अनजान हैं। इसलिए लाइन लगाने को विवश हैं।
विज्ञापन


-

ऑनलाइन दवा और जांच का दवा हवा में

मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में सभी चिकित्सकों को ऑनलाइन दवा और जांच लिखने के लिए हर चिकित्सक के कक्ष में इंटरनेट से लैश कंप्यूटर सेट लगा दिया गया है। 15 से अधिक सेट लगे एक साल से अधिक का वक्त गुजर चुका है। ऑनलाइन जांच और दवा लिखने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इसका उद्देश्य था कि मरीजों का सारा ब्यौरा ऑनलाइन रहे और हमेशा देखा जा सके।

-

मरीजों को देखें या कंप्यूटर पर डाटा अपडेट करें

चिकित्सक के ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। ऐसे में चिकित्सक मरीज को देखें उनकी बीमारी को जाने या फिर कंप्यूटर पर दवा और जांच लिखें। अगर ऑपरेटर तैनात हो तो चिकित्सक के साथ ही मरीजों को लाभ मिले। लेकिन यहां बेहतर सुविधा के दावे ही हुए।

-

जानकारी से अनजान

आभा एप और मेडिकल कॉलेज के पोर्टल पर डॉक्टरों का नाम और अप्वाइंटमेंट हो सकता है। इसके लिए पोर्टल लांच है। जिस मरीज को टोकन नंबर मिल सकता है। लेकिन इस जानकारी से मरीज अनजान हैं। अगर जागरूकता फैलाई जाए तो मरीजों को सहूलियत मिले। उनका समय बचे और आसानी से चिकित्सक को दिखा सकें और जांच करवा सके।

-

अस्पताल में सुविधाएं कहने के लिए बेहतर हुई हैं। मेडिकल कॉलेज के नाम पर कई गुना भीड़ बढ़ गई है। लेकिन सुविधाएं मेडिकल कॉलेज जैसी नहीं मिल रही है। मरीजों को हर जगह लाइन लगाना पड़ रहा है।

-पिंटू

-

काउंटर से ही पर्ची लेना पड़ता है। जबतक नंबर आता है और पर्ची मिलती है, तब डॉक्टर को केवल दिखा ही पाते हैं। जांच रिपोर्ट जबतक मिलती है, उनके उठने का समय हो जाता है। इसलिए दूसरे दिन भी आना पड़ता है। अगर घर से नंबर लग जाए तो अच्छा है, लेकिन हमें इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।

सुमन

-

आज ओपीडी की स्थिति

मेडिकल कॉलेज से मिले के आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार को ओपीडी काउंटर से तय समय तक 936 पर्ची कटा था। जबकि आभा एप से ऑनलाइन 27 पर्ची बनी थी। दोनों मरीजों को एक साथ देखा जाता है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन का कोई अलग नियम या प्राथमिकता तय नहीं किया गया।
विज्ञापन


-

आभा एप पर ऑनलाइन नंबर लगता है। इस एप के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ओपीडी में लगे कंप्यूटर पर जल्द ही काम शुरू होगा। प्रशिक्षित किया कराया जाएगा। जो सुविधाएं हैं, उसमें मरीजों को बेहतर इलाज किया जा रहा है।

-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें