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Siddharthnagar News: पोखरों में भरे अवशेषों की परवाह और न दुर्गंध की

Fri, 27 Oct 2023 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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आस्था का विसर्जन : प्रतिमाओं में लगी लकड़ी ले जाने के लिए दूसरे दिन लगी रही भीड़, लोगों में सामान समेटने की मची होड़
अमर उजाला लाइव

संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जमुआर घाट पर प्रतिमा विसर्जन के बाद प्राकृतिक नाला मलबे से पट गया। नगर पालिका परिषद ने सफाई की सुध नहीं ली। विसर्जन के दो दिन बाद बृहस्पतिवार को न तो पोखरों और आसपास की सफाई नहीं की गई। अब पोखरे के पानी से दुर्गंध भी आने लगी है। वहीं, प्रतिमाओं के अवशेष बटोरने की होड़ बृहस्पतिवार को भी दिखी। लोग पूजन सामग्री, प्रतिमाओं के अवशेषों के साथ आस्था को पैरों तले रौंदते रहे।
जमुआर पुल के नीचे प्रतिमाएं पानी में पड़ी हुई हैं। नगर पालिका परिषद ने जेसीबी या श्रमिकों को लगाकर सफाई नहीं कराई। प्रतिमाओं का बांस का ढांचा, लकड़ी सहित अन्य सामान पोखरों में पड़ा है। शुक्रवार को भी दोपहर में पोखरी से सामान निकालने की होड़ रही। ऐसी ही स्थिति बांसी के घाटों व शोहरतगढ़ के ढोई नदी में भी है।
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शहर में नौ दिनों की पूजा के बाद दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन मंगलवार से शुरू हुआ। विसर्जन के लिए पूरी तैयारी की गई, लेकिन अधिकारियों ने न तो आस्था का ध्यान रखा और न ही संरक्षण की जिम्मेदारी निभाई है। जिले के डुमरियागंज सहित कुछ क्षेत्रों में विसर्जन का सिलसिला जारी है। शनिवार को भी विसर्जन होगा। तीन दिनों से हो रहे विसर्जन के बाद पोखरों की साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया।

आस्था से दूर, सिर्फ अपने काम की मजबूरी
जमुआर घाट पर भी गंदगी नजर आ रही है। पानी में जगह-जगह पूजन सामग्री और तस्वीरें फेंकी पड़ी थीं। घाटों और पोखरों के पास गंदगी देखकर लोगों ने नाराजगी भी जताई। कहा कि प्रशासन को सफाई का पूरा इंतजाम करना चाहिए। प्रतिमाओं के ढांचे में लगे बांस और पटरी को निकाल रहे लोगों ने बताया कि इसका इस्तेमाल कुछ बनाने या फिर जलाने में करेंगे। बर्डपुर के मूरत ने बताया कहा कि लकड़ियों के सहारे वे खेतों में बाड़ बनाएंगे ताकि उनकी फसल की सुरक्षा हो सके। सोना देवी ने बताया कि प्रतिमाओं के कपड़ों से परदा बनाएंगी।


दशहरा हो या कोई भी पर्व प्रतिमाओं के साथ एक सा सम्मान होना चाहिए। इन प्रतिमाओं को घर लाते समय देवी मां का भाव होता है तो इनका विसर्जन भी इसी भाव के साथ लोगों को करना चाहिए। पूजा-पाठ लोक कल्याण के लिए होता है। लेकिन, इसे मस्ती तक सीमित करना चिंताजनक है। समझदारी के साथ सभी मां की आशा को महत्व और पूरे भाव में विसर्जन भी करें।
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-नरसिंह त्रिपाठी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य



सभी त्योहार हमारी आस्था व परंपरा से जुड़े हैं। अगर इसके निर्वहन में लापरवाही बरती जा रही है तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। हम जिस आस्था से पूजा-पाठ करते हैं, उसी आस्था से देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी करना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए, जिससे आस्था को ठेस पहुंचे।
-चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
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