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Siddharthnagar News: इंजीनियरिंग छोड़ खेती से खोली तरक्की की राह, अन्य किसानों को करते हैं प्रेरित

Fri, 23 Dec 2022 04:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।

सार

पाली हाउस लगाकर वह एक लाख रुपये प्रति माह तक कमा रहे हैं। इसके साथ ही गेंदा, गुलाब और सीजन की सब्जी की खेती करके वह तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों को गेहूं और धान की फसल से हटकर खेती करके आय को बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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खुनियाव के बभनी गांव में फूल की खेती। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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विस्तार
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महंगाई के बीच जहां किसान खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। वहीं, युवा इंजीनियर ने 70 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी को छोड़कर खेती की तरफ रुख किया। मिट्टी की महक उसे गांव खींच लाई। आज वह किसानों के लिए नजीर बन चुके हैं।
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पाली हाउस लगाकर वह एक लाख रुपये प्रति माह तक कमा रहे हैं। इसके साथ ही गेंदा, गुलाब और सीजन की सब्जी की खेती करके वह तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों को गेहूं और धान की फसल से हटकर खेती करके आय को बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

खुनियांव ब्लॉक के सेमरी गांव के टोला बभनी निवासी अतुल वर्मा ने सैनिक स्कूल भुवनेश्वर से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। इंजीनियर बनने की इच्छा हुई तो कोटा चले गए। कोटा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके आठ से तक कई कपंनी में 60-70 हजार रुपये प्रतिमाह पर काम किया। लेकिन अपने साथ- साथ अन्य लोगों को रोजगार देने और मिट्टी की महक उन्हें गांव की ओर खींच लाई।
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नौकरी छोड़कर वह गांव आ गए और उन्होंने परिवार के लोगों से खेती करने की इच्छा जाहिर की तो वह असहज महसूस किए। उन्हें लगा कि हमेशा घर से बाहर रहकर पढ़ने वाला कैसे खेती करेगा। पाली हाउस लगाने की सोची, योजना बड़ी थी, लेकिन हौंसले बुलंद थे। सरकारी अनुदान से दो हजार वर्ग मीटर में पाली हाउस लगाया।

इसमें जरबेरा के 12 हजार पौधे लगाए। इसमें प्रतिदिन ढाई से तीन हजार फूल निकलता है। यह फूल स्टेज सजाने, माला, गुलदस्ता बनाने आदि में प्रयोग होते हैं। बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर सहित अन्य शहरों में मांग के हिसाब से फूल जाता है। एक फूल दो से 20 रुपये तक बिक जाता है।

अतुल के मुताबिक जरबेरा ऐसा फूल है जो कई दिनों तक मुरझाता नहीं है। नवंबर से 15 दिसंबर तक विशेष मांग रहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई यंत्र लगाया है, जिस पर अनुदान मिला था। एक माह में पाली हाउस से 60 हजार से एक लाख रुपये तक की आमदनी होती है।

मौसम के हिसाब से खेती
अतुल वर्मा ने बताया कि मौसम के हिसाब से फूल की खेती करते हैं, जिससे कभी खाली न रहे। वह गुलाब, गुड़हल और गेंदा की खेती लगभग तीन एकड़ रकबे पर करते हैं। इसके लिए आयोध्या, गोरखपुर, लखनऊ सहित अन्य शहरों से खरीदने वाले आते हैं। इसे दर्जन और पीस दोनों हिसाब से बेचा जाता है।

10 एकड़ में आलू और गोभी की फसल लगाई
अतुल ने बताया कि मौजूदा समय में उनका आलू तैयार हो गया है। जिसकी खुदाई करके मंडी में भेजा जा रहा है। गोभी अभी जल्द लगी है जो एक माह बाद तैयार होगा। जब यह तैयार होगा तो अच्छा रेट मिलेगा।

25 लोगों को दिया रोजगार
खेती करने के लिए 25 लोगों को नियमित जोड़कर रखा है। जो खेती के काम में नियमति लगे रहते हैं। कुड़ाई, फूल की तोड़ाई और गुलदस्ता बनाने सहित अन्य कार्य करते हैं। आवश्यकता के अनुसार मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाती है।
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