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Siddharthnagar News: मुखबिर तंत्र से दूर, पुलिस सीसी कैमरे और मोबाइल पर निर्भर हुई

Sat, 23 Dec 2023 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। हाईटेक पुलिसिंग के चक्कर में पुलिस पुराने मुखबिर तंत्र के रास्ते से दूरी बना चुकी है। जिसकी वजह से कई घटनाओं का खुलासा करने में उसे पसीना छूट रहा है। इससे सीसीटीवी में दिखने वाली और मोबाइल से संबंधित घटनाएं तो आसानी से खुल जा रही है। लेकिन जिन घटनाओं में इनका प्रयोग नहीं होता उन अनसुलझे केस को सुलझाने में पुलिस उलझकर रह जा रही है।
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नजीर के तौर पर चोरी की घटनाएं हैं, जिले में हाल हुई में चोरी की तीन घटनाओं को पुलिस ने खुलासा कर दिया। इन घटनाओं का पर्दाफाश करने में पुलिस को सीसी कैमरे के जरिए मदद मिली। लेकिन उन घटनाओं को पर्दाफाश नहीं कर पा रही है, जहां सीसी कैमरे नहीं लगे हैं। पूर्व पुलिस अफसर का कहना है कि पुरानी पुलिसिंग से पुलिस हट चुकी है। अब सर्विलांस और सीसी कैमरे पर निर्भरता बढ़ गई है। इससे इतर जाकर पुलिस काम करना नहीं चाहती है। जबकि पहले बीट के सिपाही और दरोगा की गांव और क्षेत्र में पकड़े रहती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस को हाईटेक टेक्नालॉजी के साथ ही पुरानी पुलिसिंग पर काम करने की जरूरी है।


चार घटनाओं को पुलिस ने खोला

जिले में एक माह के भीतर चोरी की चार घटनाएं हुई। इसमें कोतवाली क्षेत्र के धेंसा में एक ही रात में चार दुकान, कठेला समय माता थाना क्षेत्र में एक ही चार चार दुकान, सदर थाना क्षेत्र में एक रात एक दुकान और दो दिन बाद एक घर में चोरी की वारदात हुई। इसमें कठेला समय माता थाने की पुलिस ने चोरी के मामले में एक शातिर को पकड़ा। पुलिस ने दावा किया कि कैमरे की मदद से चोर तक पहुंचे। वहीं, जोगिया पुलिस ने चोरी की चार घटनाओं को खोला। उसने बताया कि सीसी कैमरे की फुटेज से 17 दिन तलाश किए। इसके बाद शातिर चोर को पकड़ने में कामयाबी हासिल हुई। सदर पुलिस ने भी शिक्षक के यहां हुई चोरी का खुलासा किया। दो शातिर चोर पकड़े गए। पुलिस के मुताबिक सीसी कैमरा अहम साबित हुआ।
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इन घटनाओं को नहीं खोल पाई पुलिस

सदर थाना क्षेत्र के इंद्रानगर में ठेकेदार के घर एक वर्ष पहले चोरी हुई थी। इसमें नकदी सहित 20 लाख रुपये से अधिक की चोरी हुई थी। कई थानाध्यक्ष बदल गए, खुलासा नहीं हुआ। कारण आसपास कोई सीसी कैमरा नहीं था। इसके साथ ही स्टेशन रोड और पुलिस कार्यालय के पीछे दो घरों में अप्रैल माह में हुई 30 लाख से अधिक की चोरी की घटना का पुलिस पर्दाफाश नहीं कर सकी है। इसी तरह जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 20 से अधिक चोरी की घटना का पर्दाफाश पुलिस सालभर बाद भी नहीं कर पाई है। कारण अब सर्विलांस और सीसी कैमरे की मदद हर जगह ढूंढ रही हैं।

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बदल गया पुलिस के कार्य करने का तरीका

2018 में सेवानिवृत्त हुए इंस्पेक्टर शिवशंकर पांडेय ने बताया कि अब पुलिसिंग का तरीका एकदम बदल चुका है। सर्विलांस के जरिए पुलिस ट्रेस करती है। साथ ही आसपास लगे सीसी कैमरे के फुटेज को ढूंढती है। जिसके सहारे चोरी सहित अन्य प्रकार के अपराध का पर्दाफाश करती है। लेकिन यह तो दिखने वाला केस हो गया जो ओपन है और सामने है, जाकर पकड़ लिया। इससे इतर जब अपराध होता है तो पुलिस मुश्किल में पड़ जाती है। इसका कारण यह है कि मुखबिर तंत्र पुलिस का कमजोर हो चुका है। पहले बीट सिपाही थाने से निकलता था तो कई दिनों तक क्षेत्र में रह जाता था। इससे अच्छे बुरे लोगों से उसकी पहचान होती थी। जैसे ही कोई घटना हुई सिपाही ही केस को खोल देता था।

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इसलिए खुल जाती थी घटना

इंस्पेक्टर के मुताबिक पहले चोरी और डकैती की घटनाएं होती थीं, जिसमें 10-20 किलोमीटर के दायरे के चोर और बदमाश वारदात करते थे। घटना के वक्त कौन गांव में था और कौन नहीं। इसके बारे में मुखबिर के जरिए बीट सिपाही को जानकारी मिल जाती थी। दो दिन उसके गतिविधि पर नजर रखते थे और पुख्ता होने पर पकड़ लिया जाता था। अब वह सिस्टम खत्म हो चुका है।

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चोरी की घटनाओं का पर्दाफाश करने में पुलिस टीम लगी हुई है। पुलिस हर स्तर से मामले की जांच करती है। जहां तकनीकी का सहारा लेना होता है, वहां उसका प्रयोग किया जाता है। कुल मिलाकर पुलिस का उद्देश्य है कि किसी भी घटना का पर्दाफाश हो।
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-अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
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