जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद शुरू करने का दिया था निर्देश
महिला अस्पताल के बगल में बने 300 बेड के अस्पताल में संसाधन की कमी के कारण नहीं हो पा रहा था संचालन
इसी माह के अंत तक शुरू किए जाएंगे कई वार्ड, मरीज को मिलेगी राहत
अभी तक जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती किए जाते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के 300 बेड के अस्पताल के संचालन की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। हैंडओवर होने के बाद धनराशि न मिलने के कारण संसाधन के अभाव के कारण संचालन अटक गया था। कुछ दिन पहले ही जिलाधिकारी ने अस्पताल का निरीक्षण किया और जल्द संचालन का निर्देश दिया था। इसके बाद इस अस्पताल के संचालन के लिए संसाधन आने लगा है। धीरे-धीरे करके सभी वार्ड शुरू किए जाएंगे।
पहले चरण में बर्न वार्ड चालू कराए जाने का कार्य शुरू हो गया है। अगस्त माह के दूसरे सप्ताह तक यह वार्ड शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही अन्य वार्ड की प्रक्रिया भी इसी के साथ-साथ चलेगी। जैसे-जैसे सुविधा लैस होगा, आईसीयू सहित आदि वार्ड बनाकर मरीजों के भर्ती करने का कार्य शुरू हो जाएगा। कुल मिलाकर इसी दो तीन माह में पूरा अस्पताल शुरू करने का लक्ष्य है। इसके लिए शुरू होने के मरीजों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। क्योंकि पुराने अस्पताल में जगह कम होने के कारण दिक्कत होती है।
जिले की लगभग 28 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए 226 करोड़ की लागत माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई। इसमें प्रशासनिक भवन के साथ 300 बेड का अस्पताल शामिल है। मेडिकल कॉलेज संचालन जैसे ओपीडी और ओटी की व्यवस्था जिला अस्पताल के पुराने भवन में चल रही है। 300 बेड के अस्पताल का भवन एक साल पहले तैयार हो गया है। वायरिंग, पानी, और हर बेड पर ऑक्सीजन पहुंचे, इसके लिए पाइप लाइन ऑक्सीजन की व्यवस्था से लैस करके छोड़ दिया गया था।
अस्पताल संचालन के लिए बेड, ओटी के लिए मशीन और संसाधन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए शासन की ओर से बजट की जरूरत थी। इसलिए अस्पताल शुरू नहीं शुरू हो पा रहा था। अब जल्द ही अस्पताल का संचालन शुरू हो जाएगा। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान जुलाई माह के अंत तक शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कार्य में तेजी आ गई है। वार्ड बनाए जाने का कार्य शुरू हो गया है। पहले बर्न वार्ड तो तैयार किया जा रहा है। बेड के साथ ही अन्य संसाधन आ भी गया है। बर्न और एक अन्य वार्ड अगस्त माह के दूसरे सप्ताह तक शुरू भी हो जाएगा। इसके अलावा अन्य वार्ड के लिए भी कार्य शुरू हो रहा है। एक-एक वार्ड तैयार करके मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
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अस्पताल शुरू हो तो इन्हें मिले लाभ
300 बेड का अस्पताल शुरू होने से इसमें बर्न केयर यूनिट शुरू हो जाएगी। जिससे जलने वाले मरीजों लाभ मिले। आईसीयू की सुविधा होनी है, इसके बनाने का कार्य शुरू हो रहा है। इससे तो हार्ट अटैक, हादसे के शिकार और अन्य गंभीर रोगियों को सहूलियत मिलेगा है। इसके साथ ही आधुनिक ओटी बनने से ऑपरेशन आसानी से हो जाएगी।
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इन मरीजों को होना पड़ता है रेफर
ट्रामा सेंटर और आईसीयू नये अस्पताल में संचालित होना है। ट्रामा सेंटर न होने के कारण हर दिन हादसे के शिकार पांच से सात मरीज इसलिए रेफर कर दिए जाते हैं कि सर्जरी करने और उन्हें रखने के लिए आईसीयू की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार हार्टअटैक दो से तीन रोगियों रेफर किया जाता है। क्योंकि उन्हें भी आईसीयू की जरूरत पड़ती है। इसके लिए अन्य गंभीर बीमारी के शिकार मरीज, जिन्हें आईसीयू और वेंटीलेटर की जरूरत है, उन्हें रेफर कर दिया जाता है। 24 घंटे में कम से कम 10-12 मरीज रेफर किए जाते हैं। इस अस्पताल के चलने और वार्ड शुरू होने से मरीजों को लाभ मिलेगा।
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बनाया जा रहा है पीआईसीयू वार्ड
महिला अस्पताल में पीआईसीयू वार्ड बनाया जा रहा है। अभी तक 15 बेड का वार्ड पुराने अस्पताल में चल रहा है। 42 नये बेड के साथ कुल 57 बेड का पीआईसीयू वार्ड कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगा। इससे बच्चों को भर्ती करने में सहूलियत मिलेगा। दिमागी बुखार की सीजन शुरू होने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ती थी तो एक बेड पर कई मरीज भर्ती किए जाते थे। इसके बन जाने से यह समस्या दूर हो जाएगी।
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300 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग एक साल पहले ही हैंडओवर हो चुका है। बेड सहित अस्पताल में संचालन के लिए कार्य शुरू हो गया है। बर्न वार्ड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। बेड आदि आ गए हैं। इसके साथ ही अन्य वार्ड के लिए भी कार्य शुरू किया जा रहा है।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज