सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहकर बुखार सहित अन्य बीमारियों को जोखिम है कि कहीं उन्हें टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) का संक्रमण न मिल जाए, क्योंकि जनरल वार्ड में सामान्य मरीजों के बीच में ही टीबी के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। डॉक्टर भी मान रहे हैं कि सामान्य मरीजों के बगल में टीबी मरीज भर्ती हो रहे हैं, इसे छींकने खांसने के दौरान वे सामान्य मरीज भी टीबी से संक्रमित हो सकता है, लेकिन टीबी मरीजों के लिए अलग वार्ड नहीं बनाया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के जनरल वार्ड में एक सप्ताह में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं, जिनमें 3-5 मरीज टीबी संक्रमित होते हैं। एक दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज में तीन टीबी संक्रमित मरीज भर्ती किए गए हैं। एक ही वार्ड में टीबी मरीजों को भी भर्ती होने से संक्रमण फैलने की आशंका है। स्वस्थ व्यक्ति भी अचानक बीमार हो जाता है तो उस दौरान उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, ऐसी स्थिति में मरीजों को टीबी होने की आशंका अधिक है। सामान्य मरीज को पता नहीं होता है कि उनके बगल में भर्ती मरीज टीबी से संक्रमित है, इससे यह और जोखिम पूर्ण है। टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग विशेषज्ञ डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि टीबी मरीजों के लिए अलग वार्ड नहीं है। जो मरीज आते हैं, उन्हें जनरल वार्ड में भर्ती किया जाता है। कोशिश की जाती है कि जल्द ही मरीज का इलाज करके घर भेज दिया जाए।
टीबी क्लीनिक में दी जाती है दवा
मेडिकल कॉलेज परिसर से सटे हुए टीबी क्लीनिक है, जहां मरीजों के नियमित दवाइयां मिल जाती है। यहां टीबी हॉस्पिटल नहीं है, इसलिए मरीजों का भर्ती नहीं किया जाता है। डिप्टी डीटीओ डॉ. मानवेंद्र पाल ने बताया कि एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) कटेगरी के गंभीर टीबी मरीजों को भर्ती करना होता है तो उन्हें बस्ती रेफर कर दिया जाता है।
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डे केयर वार्ड भी अटका
मेडिकल कॉलेज परिसर में एमडीआर मरीजों के लिए चार बेड का डेर केयर वार्ड बनाने का काम भी अटका हुआ है। प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि जहां पुराना टीबी क्लीनिक परिसर में था, उसे डे केयर वार्ड बनाने की योजना है। इसमें एमडीआर मरीज दिन भर रहते और अन्य मरीजों से दूर ही रहते हुए इंजेक्शन लगवाकर चले जाते। इस भवन पर फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने संघ भवन के नाम पर ताला लगाया गया है। इस मामले में जिलाधिकारी को भी पत्र दिया गया है। इस मामले में फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी गोविंद प्रसाद ओझा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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करीब 2400 हैं टीबी मरीज
जिले में वर्ष 2023 में 2392 टीबी रोगी खोजे गए हैं, जिनमें 137 एमडीआर टीबी मरीज है। एमडीआर ऐसे मरीज होत हैं, जिनकी दवा बीच में छूट जाती है और अधूरी दवा के कारण टीबी गंभीर रूप लेती है तो उस मरीज के शरीर में सामान्य दवा कार्य नहीं करती है और अधिक क्षमता की दवा दी जाती है। ऐसे मरीज से किसी को संक्रमण होता है तो एमडीआर कटेगरी का ही संक्रमण होता है।
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मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीजों के लिए अलग वार्ड नहीं बनाया गया है। जब नई बिल्डिंग में अस्पताल शुरू होगा तो अलग वार्ड बनाना संभव होगा। एमडीआर टीबी के डे केयर बनाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। यह वार्ड बनाना आवश्यकता है।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य