सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन वार्ड में डॉक्टर एक मरीज को देखने में दो मिनट से भी कम समय दे रहे हैं, जबकि एक मरीज की केस हिस्ट्री समझने में 10 से 15 मिनट का समय मिलना चाहिए। करीब डेढ़ लाइन में खड़े होने के बावजूद डॉक्टर मरीज को दो मिनट में ही दवा लिख रहे हैं। इससे मरीज भी मायूस हो रहे हैं, क्योंकि वे अपनी पूरी बात भी डॉक्टर को नहीं बता पा रहे हैं।
मेडिकल काॅलेज के पड़ताल के दौरान पाया गया कि जनरल मेडिसिन ओपीडी में 30 मिनट के अंदर दो डॉक्टरों ने मिल कर 27 मरीजों काे दवा लिख दी, जिसमें सबसे ज्यादे मरीज पेट या कमर दर्द से पीड़ित थे। मरीजों का कहना है कि डेढ़ से दो घंटे लाइन में खड़ा होकर जब डॉक्टर साहब के पास जाते है तो वे दो मिनट में ही देख कर दवा लिख देते हैं, जिससे वे मरीज की समस्या को अच्छी तरह नहीं जान पाते और कभी-कभी जांच लिखकर चेकअप के लिए भेज देते हैं और बाद में उसी के आधार पर दवा दे देते हैं। यदि जनरल मेडिसिन के कमरे अधिक होने चाहिए, जबकि मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन के लिए चार डॉक्टर की नियुक्ति हुई है, जिसमें से तीन असिस्टेंट प्रोफेसर हैं जबकि एक एसआर हैं।
ओपीडी में बुधवार को असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंह सहित दो डॉक्टर मरीज देख रहे थे। पांच घंटे में 120 मरीजों को परामर्श दिया, जबकि इसी दौरान उन्होंने पुराने मरीजों की रिपोर्ट भी देखी।
पेट में दर्द का इलाज कराने आया हूं, भीड़ में किसी तरह डॉ. साहब के पास पहुंचा तो दो मिनट से कम समय में ही उन्होंने दवा लिख दी।
पुरषोतम, कल्लाखोर
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सर दर्द की दवा करवाने के लिए आया हूं, लेकिन डॉक्टर साहब बात करके ही दवा लिख दिए हैं, यदि दो ओपीडी होती तो दवा कराने में आसानी होती, अच्छे से जांच भी हो पाती।
महेंद्र, बरगदवा -
पैर में नस संबंधी दिक्कत है, सोचा था कि मेडिकल काॅलेज में अच्छी से जांच हो जाएगी, लेकिन यहां मरीजों की संख्या अधिक होने से दो ही मिनट में दवा लिख दे रहे हैं।
शेषनरायन, महमुदवागढ़
रीढ़ की हड्डी में दर्द होता है, जिसे दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे, दो घंटा लाइन में खड़ा होना के बाद दो मिनट में ही दवा लिख कर भेज दिए।
विक्रम, नेतवर
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वर्जन
मेडिसिन की ही ओपीडी है, जिसमें एक डॉक्टर के साथ एक जेआर बैठते हैं। मरीजों की संख्या अधिक रहती है सभी मरीजों को देखना रहता है इस कारण जल्दी रहती है। जल्द ही जनरल मेडिसिन की ओपीडी दो कमरों में चलाने की व्यवस्था बनाई जाएगी।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज