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Siddharthnagar News: मरीज माफिया ने बेहोशी के डॉक्टरों के बहाने मरीजों को भेज रहे निजी अस्पताल

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मेडिकल कालेज के परिसर में ​​स्थित एमसीएच विंग। संवाद
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मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग से एक माह में रेफर हुए 43 मरीज, 135 हो गए लामा
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मरीजों को हो रहा शोषण, कॉलेज प्रशासन नहीं लगा पा रहा अंकुश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में मरीज माफियाओं की दाल गलने लगी है। बेहोशी के डॉक्टरों की कमी बताकर प्रसव के लिए पहुंची महिलाओं को रेफर कराकर निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। सिस्टम में घुसे मरीज माफियाओं के कारण मरीजाें का शोषण हो रहा है। मेडिकल प्रशासन भी इन पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है।


मेडिकल कॉलेज में बेहोशी के एक ही डॉक्टर हैं। नियम के अनुसार सर्जरी की नौबत आने पर बेहोशी के डॉक्टर को बुलाया जाता है, लेकिन इसी का फायदा उठाकर मरीज माफिया मरीजों काे निजी अस्पताल में भेजकर काली कमाई कर रहे हैं। एक स्वास्थ्य कर्मी महिला ने बताया कि एमसीएच विंग में यह नया खेल है। इसमें कुछ स्वास्थ्य कर्मी भी संलिप्त हैं। वे मरीजों को जोखिम दिखाकर इतना डरा देते हैं कि वे यहां से रेफर होकर या लामा लिखवाकर चले जाते हैं। लामा के अंतर्गत ऐसे मरीज होते हैं, जो अपनी मर्जी से चले जाते हैं। एक डॉक्टर ने बताया कि ये बड़ा खेल है। एक मरीज को रेफर कराने पर 15 से 25 हजार रुपये कमीशन मिलता है।
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मेडिकल कॉलेज में एक माह में 43 मरीज रेफर हुए हैं, जबकि 135 लामा हो गए हैं। इसमें 135 मरीज अपनी अर्जी पर डॉक्टर की बिना सहमति के गए हैं। इस दौरान 140 नार्मल एवं 118 सिजेरियन डिलीवरी हुई है। अस्पताल में अचानक रेफर के केस बढ़ गए हैं। मरीज को निजी अस्पताल पहुंचाने वाले माफिया उन्हें इतना समझा देते हैं कि रेफर होने के बाद भी वे यहीं कह रहे हैं कि वे अपनी मर्जी से अस्पताल से गए हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को शिकायत मिलने का इंतजार है।

एक डॉक्टर आए नहीं, दो कराते हैं सर्जरी
मेडिकल कॉलेज में निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. विजय दुबे हैं। इकलौते डॉक्टर होने के कारण 24 घंटे उनकी जिम्मेदारी है। 24 घंटे में जनरल ओटी में 8-9 सर्जरी होती है, जबकि इतनी ही सर्जरी गायनिक ओटी में है। यहीं कारण है कि अस्पताल में रात में बेहोशी के डॉक्टर की नियमित ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है, वे बुलाने पर आते हैं। सीएमएस डॉ. एके झा के प्रस्ताव पर सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने डॉ. मेहताब आलम एवं डॉ. सौरव चतुर्वेदी को तीन-तीन दिन मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी करने का निर्देश दिया है। शोहरतगढ़ सीएचसी में तैनात डॉ. सौरव चतुर्वेदी मेडिकल कॉलेज में नहीं आ रहे हैं, जबकि डॉ. मेहताब तीन दिन सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक सर्जरी कराते हैं, उनकी नियुक्ति संविदा पर हुई है।

नहीं दी गई डॉक्टर को ड्यूटी नहीं करने की सूचना
सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि सीएमएस डॉ. एके झा ने उन्हें बेहोशी के डॉ. सौरव चतुर्वेदी के ड्यूटी नहीं करने की सूचना नहीं दी है। यदि डॉक्टर ड्यूटी नहीं कर रहे हैं तो इसकी लिखित सूचना देनी चाहिए। ये सूचना देंगे तो इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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वर्जन
एमसीएच विंग में रात में सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता पड़ने पर बेहोशी के डॉक्टर को बुलाया जाता है। जब मरीज के साथ ही दलाल अंदर आ जाएंगे तो उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर समझते हैं कि वे परिजन हैं। बेहोशी के डॉक्टर कम है। डॉ. सौरव चतुर्वेदी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, एक डॉक्टर तीन दिन चार घंटे के लिए आते हैं। सीएमओ को पत्र लिखकर बेहोशी के डिप्लोमा वाले डॉक्टर मांगा हूं।
डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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