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धैर्य और सादगी विद्यार्थी जीवन की सफलता की कुंजी : कुलपति

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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आयोजित दीक्षारम्भ कार्यक्रम में उप​स्थित छात्र-छात्राएं। 
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नव प्रवेशी विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में शुक्रवार को नवागंतुक एवं नव प्रवेशी विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ (इंडक्शन) कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि प्रतियोगिता के इस युग में विद्यार्थियों के लिए चुनौतियां अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं। आवश्यक है कि अपने को इन चुनौतियों से सामना करने व समाधान करने के लिए सक्षम बनाना होगा। शिक्षा विद्यार्थी जीवन में नवनिर्माण का कार्य करती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जिस विषय का चयन करें, अध्ययन के लिए उसमें अनंत परिश्रम उसे करना ही होगा। कठोर परिश्रम ही सफलता और करियर बनाने का सबसे बड़ा साधन है। रुचि और क्षमता के अनुसार विषय का चयन करना चाहिए। विद्यार्थी जीवन में एकाग्रता और साधना आवश्यक है। धैर्य और सादगी विद्यार्थी जीवन की सफलता की कुंजी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थी जीवन की चुनौतियों को यद्यपि कम करने का प्रयास है। शैक्षिक संस्थान सर्व मुखी प्रतिभा को विकसित करने का अवसर उपलब्ध करने वाला होना चाहिए। अध्ययन के साथ-साथ किसी एक कौशल में दक्षता जो उसके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। जिज्ञासु विद्यार्थी कठिन से कठिन चुनौती और बड़ा से बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकता है ।
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प्रो. सुशील तिवारी ने कहा की शिक्षा की यशस्वी परंपरा और संस्कार भारतीय जीवन दर्शन के मूल में रहे हैं। महात्मा बुद्ध की ज्ञान और चेतना की इस पावन धरती पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का होना और उसका विद्यार्थी होना अपने आप में उपलब्धि है। विदेशी ने भारतीय विद्या एवं शिक्षा की यशस्वी परंपरा को खंडित करने का पुरजोर कोशिश किया लेकिन भारत की शिक्षा, संस्कृति और सनातन परंपरा में इतनी अपार क्षमता है कि वह कभी समाप्त नहीं हो सकती। भारत की ही परंपरा में पिता अपेक्षा करता है कि पुत्र उससे आगे निकल जाए। गुरु यह अपेक्षा करता है उसका शिष्य उससे भी आगे उपलब्धि प्राप्त करें। विद्यार्थी के मन में हमेशा प्रश्न पैदा करना शिक्षक का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
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प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के बहुमुखी व्यक्तित्व विकास का अधिकतम अवसर उच्च शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध है। प्रत्येक विद्यार्थी की चिंता शिक्षक का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। इसमें तीव्र बुद्धि वाले और कमजोर विद्यार्थियों को दोनों की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ईमानदारी के साथ निरंतर प्रयास कर रहा है ।आज के वैश्विक भारत में डिग्री प्राप्त करने मात्र से जीवन की सफलता का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा बल्कि उसकी योग्यता और कौशल के साथ विद्यार्जन करना चाहिए।
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शोधपीठ की चेयर डॉ. मंजू द्विवेदी ने कहा की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की यात्रा में विद्यार्थी के जीवन में कई पड़ाव आते हैं। बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा का सबसे बड़ी पाठशाला उसका परिवार और घर का आंगन होता है। व्यक्ति के जीवन में भारतीय परंपरा में 16 संस्कारों का अत्यधिक महत्व है। दीक्षा आरंभ का संस्कार विद्यार्थी के शैक्षिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। आज के चुनौतीपूर्ण परिवेश में दीक्षा और शिक्षा कैसे ग्रहण किया जाए यह गंभीर प्रश्न है।
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इस दौरान डॉ शरदेंदु त्रिपाठी, डॉ. सच्चिदानंद चौबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. सत्येंद्र कुमार दुबे, राजेश कुमार सिंह, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, डॉ. नीता यादव, डॉ. अमित साहनी, डॉ. रविकांत शुक्ला, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. रेनू त्रिपाठी और डॉ. हृदयकांत पांडेय आदि मौजूद थे।
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