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बढ़नी, जोगिया और उसका क्षेत्र में किसानों की फसल जलमग्न

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इटवा के परासी नाले में उफान से धान की डूबी फसल। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बढ़नी, जोगिया और उसका क्षेत्र में किसानों की फसल जलमग्न
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सिद्धार्थनगर। मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश से उत्पन्न सूखे की स्थिति में किसी तरह अपनी फसल बचा लिए किसानों की उम्मीदों पर अब बाढ़ ने पानी फेर दिया है। फसल डूबने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गईं हैं। उनकी पूंजी डूबती नजर आ रही है। पहले सूखा और अब बाढ़ की दोहरी मार से किसानों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बढ़नी, जोगिया, इटवा, उसका क्षेत्र बाढ़ की चपेट में है।
जून से सितंबर के पहले सप्ताह तक जिले में बारिश नहीं हुई। किसान धान की नर्सरी तैयार करने एवं रोपाई के बाद भी किसी तरह मंहगे डीजल से खेत की सिंचाई करते रहे। सितंबर के दूसरे सप्ताह में बारिश शुरू हुई तो उन्हें फसल तैयार होने और लागत निकलने की उम्मीद जगी, लेकिन बाढ़ में फसल डूब जाने से किसान भी चिंता में डूब गए हैं।
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तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में बहने वाली बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी व सोतवा नाले का जलस्तर नेपाल के पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से बढ़ गया है। जिससे तहसील क्षेत्र के खैरी शीतल प्रसाद ग्राम पंचायत के करौता, चिरहगना, पन्नापुर, नकोलडीह, मुरव्वनडीह व तालकुंडा ग्रामपंचायत के तमकुहवा टोलों में घोरही नदी का पानी खेतों में फैला गया है। जिससे सैकड़ों बीघे धान व सब्जी की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। बिस्कोहर प्रतिनिधि के अनुसार बूढ़ी राप्ती नदी के जलस्तर की बढ़त फसल के लिए तबाही साबित हो रही है। इटवा तहसील क्षेत्र के बूढ़ी राप्ती नदी के तट के पास स्थित मुड़िलिया गांव के किसान नदी के कछार पर दो सौ बीघा जमीन में धान की खेती के साथ तिल व उर्द की खेती करते है। शुरू में चिलचिलाती धूप से करीब सौ बीघा धान के साथ तिल व उर्द की फसल बरबाद हो गई बाकी बची सौ बीघा खेत की फसल अब बू ढ़ी राप्ती नदी के जलस्तर बढ़ने से डूब गई है।
पहले बारिश नहीं होने से किसी तरह सिंचाई करके खेत में खड़ी फसल को बचाया, लेकिन अब बाढ़ के पानी में फसल डूब गई है, जिससे वह सड़कर बर्बाद हो जाएगी। इससे जो जमापूंजी सिंचाई में लगा चुके है, वह भी पानी में डूब गई। -चिनकू यादव, किसान
बहुत मेहनत से खेत में धान की फसल खड़ी की थी, अब बाढ़ का पानी खेत में भर जाने से उसके बचने और तैयार होने की उम्मीद टूट गई है, स्थिति यह है कि अब लागत तो छोड़िए खाने के खाद्यान्न के लाले पड़ जाएंगे।
-विनोद कुमार, किसान
पहले बारिश नहीं होने से खेत में खड़ी फसल सूखकर पीली हो गई है, किसी तरह सिंचाई करके कुछ हिस्सा बचा पाए हैं, लेकिन अब बाढ़ के पानी से लागत तक नहीं निकलेगा। जिससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। -भगवती, किसान
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खेत में खड़ी फसल बर्बाद होने से परिवार के सामने आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। फसल की उपज पर ही घर खर्च के साथ ही परिवार में बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी निर्भर है। अब चिंता सता रही है। -धर्मदास, किसान
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