सिद्धार्थनगर। नेपाल के लुंबिनी क्षेत्र के होटल व्यावसायियों ने लुंबिनी विकास निधि के भीतर मठों में होटल जैसी सुविधाएं प्रदान करने का विरोध किया है। उनका कहना है कि मठ के नाम पर कारोबार नहीं किया जा सकता, जबकि करोड़ों रुपये लगाकर यहां पर कई होटल संचालित किए गए हैं। इससे होटल व्यवसाय को नुकसान हो रहा है।
लुंबिनी होटल एसोसिएशन ऑफ नेपाल की 5वीं वार्षिक आम बैठक और तीसरे सम्मेलन के अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद ग्यावली ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मठ के नाम पर होटल का संचालन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निधि ने गलत काम किया तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यदि लुंबिनी विकास निधि के तहत मठों को होटल जैसी सुविधाओं के साथ संचालित किया जाना है और व्यापारियों के समान कर व्यवस्था के तहत लाया जाना है, तो सभी होटल व्यवसायियों को विकास निधि द्वारा जगह दी जानी चाहिए। नेपाली उद्योग और वाणिज्य महासंघ के लुंबिनी प्रांत के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद शर्मा ने कहा कि यहां निजी क्षेत्र में गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का सपना दिखाकर निवेश किया है, इसलिए अब निवेश डूब रहा है। सिद्धार्थ उद्योग वाणिज्य संघ रूपनदेही के अध्यक्ष ठाकुर कुमार श्रेष्ठ ने कहा कि पर्यटन व्यवसाय में निजी क्षेत्र में किए गए निवेश से कोई रिटर्न नहीं मिल रहा है।
लुंबिनी राज्य सरकार के सामाजिक विकास मंत्री चंद्रकेश गुप्ता ने कहा कि देश को उद्योगपतियों और व्यापारियों ने बचाया है और कहा कि उनकी रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। लुंबिनी विकास निधि के कोषाध्यक्ष सिद्धिचरण भटराई ने कहा कि लुंबिनी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र में सुधार हुआ है।