सिद्धार्थनगर। धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है। भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है। निर्मल मन व स्वच्छ भावना के साथ भगवान की शरण में जाओ तो वह मनोकामना पूरी करते हैं। श्रीअयोध्या धाम से पधारीं कथा व्यास देवी अन्नपूर्णा ने नगर के विवेकानंद नगर वार्ड स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन शिव पार्वती विवाह की व्याख्या करते हुए ये बातें कहीं। देवी अन्नपूर्णा ने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते है। कहा कि भगवान जिसका हाथ थाम लेते हैं उसे फिर छोड़ते नहीं हैं। कर्म के द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धि बहुत दिनों की नहीं होती। समय का पहिया चलता है और एक समय के बाद उसकी वैलिडिटी समाप्त हो जाती है। वैलिडिटी समाप्त न होने वाली उपलब्धि के लिए देवाधिदेव महादेव की आराधना करनी चाहिए। संवाद